Bakhsh Layalpuri

Bakhsh Layalpuri

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Bakhsh Layalpuri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Bakhsh Layalpuri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
दीदा-ए-बे-रंगमेंख़ूँ-रंगमंज़ररखदिए
हमनेइसदश्त-ए-तपाँमेंभीसमुंदररखदिए
वोजगहजोलाल-ओ-गौहरकेलिएमक़्सूदथी
किसनेयेसंग-ए-मलामतउसजगहपररखदिए
अबकिसीकीचीख़क्याउभरेकिमीर-ए-शहरने
साकिनान-ए-शहरकेसीनोंपेपत्थररखदिए
शाख़-सारोंपरजबइज़्न-ए-नशेमनमिलसका
हमनेअपनेआशियाँदोश-ए-हवापररखदिए
अहल-ए-ज़रनेदेखकरकम-ज़र्फ़ी-ए-अहल-ए-क़लम
हिर्स-ए-ज़रकेहरतराज़ूमेंसुख़न-वररखदिए
हमतोअबरेशमकीसूरतनर्म-ओ-नाज़ुकथेमगर
तल्ख़ी-ए-हालातनेलहजेमेंख़ंजररखदिए
जिसहवाकोवोसमझतेथेकिचलसकतीनहीं
उसहवानेकाटकरलश्करकेलश्कररखदिए
'बख़्श'सय्याद-ए-अज़लनेहुक्म-ए-आज़ादीकेसाथ
औरअसीरीकेभीख़दशेदलकेअंदररखदिए
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Bakhsh Layalpuri
जहान-ए-जुब्बा-ओ-दस्तारकीहिमायतक्या
यज़ीद-ए-वक़्तहैक्याऔरउसकीबै'अतक्या
मुनाफ़िक़ानारविशआमहोतीजातीहै
नक़ाब-पोशी-ए-अहबाबकीशिकायतक्या
किसीभीशख़्सकोअबहर्फ़-ए-हक़कापासनहीं
पनपरहाहैयहाँपरदरोग़-ए-हिकमतक्या
मुजाविरान-ए-जहालतकेबाला-ख़ानोंमें
सुख़न-तराज़ि-ए-इल्म-ओ-अदबकीक़ीमतक्या
मज़ातोजबहैकिरंग-ए-सुख़नहोवज्ह-ए-नुमूद
जोइश्तिहारकीमुहताजहोवोशोहरतक्या
मिरेरफ़ीक़फ़रोग़-ए-जुनूँकेआलममें
हैचाकचाकगरेबाँतोइसपेहैरतक्या
जोमिलरहाहैतुम्हेंग़ैरकीइनायतसे
यहीहैसाँसतोइससाँसकीहैक़ीमतक्या
ज़बाँभीएकज़मींभीहैएकरंगभीएक
तोफिरमियाँमन-ओ-तूकीयेअज्नबिय्यतक्या
झपटरहेहैंसभीसीम-ओ-ज़रकेलुक़्मोंपर
हवस-गिरीहैफ़क़तमंसब-ए-वज़ारतक्या
सियाहदाग़हैंयेरौशनीकेचेहरेपर
मुरीद-ए-जेहलहैक्यापेशा-ए-तरीक़तक्या
अज़लसे'बख़्श'रह-ए-पुर-ख़तरसेगुज़रेहैं
जफ़ा-शनासि-ए-अहबाबकीशिकायतक्या
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Bakhsh Layalpuri
मिरेहरलफ़्ज़कीतौक़ीररहनेकेलिएहै
मैंवोज़िंदाहूँमिरीतहरीररहनेकेलिएहै
सितम-गरनेजोपहनाईमिरेदस्त-ए-तलबमें
येमतसमझोकिवोज़ंजीररहनेकेलिएहै
मिराआईना-ए-तसनीफ़देताहैगवाही
मिराहरनुक़्ता-ए-तफ़सीररहनेकेलिएहै
रहेगातोतेराज़ुल्मपररोज़-ए-अबदतक
हमारेदर्दकीजागीररहनेकेलिएहै
जिसेमीरनिगाहोंनेकभीदेखानहींहै
मिरेदिलमेंवहीतस्वीररहनेकेलिएहै
सर-ए-बातिलकियादो-लख़्तजिसनेभीजहाँमें
सलामतबसवहीशमशीररहनेकेलिएहै
जुनून-ए-शौक़तख़रीब-ए-जहाँमिटकररहेगा
मगरहरजज़्बा-ए-ता'मीररहनेकेलिएहै
लिक्खाशे'रकोईऔरसमझबैठेहैंनादाँ
अदबमेंहर्बा-ए-तश्हीररहनेकेलिएहै
गुज़रजाएँगेहमदार-ए-फ़नासे'बख़्श'लेकिन
हमारेशहरकीतासीररहनेकेलिएहै
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Bakhsh Layalpuri
रुतबदलेतोभीअफ़्सुर्दाशजरलगताहै
औरमौसमकेतग़य्युरसेभीडरलगताहै
दर्द-ए-हिजरतकेसताएहुएलोगोंकोकहीं
साया-ए-दरभीनज़रआएतोघरलगताहै
एकसाहिलहीथागिर्दाब-शनासापहले
अबतोहरदिलकेसफ़ीनेमेंभँवरलगताहै
बज़्म-ए-शाहीमेंवहीलोगसर-अफ़राज़हुए
जिनकेकाँधोंपेहमेंमोमकासरलगताहै
खालियाहैतोउसेदोस्तउगलतेक्यूँँहो
ऐसेपेड़ोंपेतोऐसाहीसमरलगताहै
अज्नबिय्यतकावोआलमहैकिहरआनयहाँ
अपनाघरभीहमेंअग़्यारकाघरलगताहै
शबकीसाज़िशनेउजालोंकागलाघूँटदिया
ज़ुल्मत-आबादसाअबनूर-ए-सहरलगताहै
मंज़िल-ए-सख़्तसेहमयूँँतोनिकलआएहैं
औरजोबाक़ीहैक़यामतकासफ़रलगताहै
घरभीवीरानालगेताज़ाहवाओंकेबग़ैर
बाद-ए-ख़ुश-रंगचलेदश्तभीघरलगताहै
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Bakhsh Layalpuri
तिश्नगी-ए-लबपेहमअक्स-ए-आबलिक्खेंगे
जिनकाघरनहींकोईघरकेख़्वाबलिखेंगे
तुमकोक्याख़बरइसकीज़िंदगीपेक्याबीती
ज़िंदगीकेज़ख़्मोंपरहमकिताबलिक्खेंगे
जिसहवानेकाटीहैंख़ामुशीकीज़ंजीरें
उसहवाकेलहजेकोइंक़लाबलिक्खेंगे
झूटकीपरस्तिशमेंउम्रजिनकीगुज़रीहै
तीरगी-ए-शबकोवोआफ़्ताबलिक्खेंगे
शे'रकीसदाक़तपरहमयक़ीनरखतेहैं
मस्लहतकेचेहरोंकोबा-नक़ाबलिक्खेंगे
सूलियोंपेझूलेगाबद-निहादहरमुंसिफ़
मुंसिफ़ीकाजबभीहमख़ुदनिसाबलिक्खेंगे
ग़मनहींजोख़्वाबोंकीलुटगईहैंताबीरें
हमनज़रकेताक़ोंमेंऔरख़्वाबलिक्खेंगे
हिर्ज़-ए-जाँसमझतेहैंहमवतनकीमिट्टीको
अपनेघरकेख़ारोंकोहमगुलाबलिक्खेंगे
इसग़ज़लकेपरतवमेंबे-घरोंकीबातेंहैं
बे-घरोंकेनामइसकाइंतिसाबलिक्खेंगे
हरदलीलकाटेंगेहमदलील-ए-रौशनसे
'बख़्श'सौसवालोंकाइकजवाबलिक्खेंगे
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