safha-e-qirtaas par khush-rang tahreeren nahin | सफ़हा-ए-क़िर्तास पर ख़ुश-रंग तहरीरें नहीं

  - Bakhsh Layalpuri
सफ़हा-ए-क़िर्तासपरख़ुश-रंगतहरीरेंनहीं
अपनेक़ब्ज़ेमेंअभीलफ़्ज़ोंकीजागीरेंनहीं
ज़िंदगीहमनेगुज़ारीएकबेवाकीतरह
ख़्वाबवोदेखेकिजिनकीकोईता'बीरेंनहीं
जीरहेहैंशहरमेंसबलोगअंदेशोंकेसाथ
इकतिरेहीपाँवमेंसोचोंकीज़ंजीरेंनहीं
औरउछलेंगेअदबकेमस्ख़रोंकेसरयहाँ
ज़ंग-आलूदाअभीशे'रोंकीशमशीरेंनहीं
माँगेताँगेपरगुज़ाराकररहेहैंदोस्तो
ज़िंदगीकरनेकीअपनेपासतदबीरेंनहीं
चीख़कीसूरतहयात-ए-नौकाइकपैग़ामहैं
हमहवाकीलौहपरबे-जानतस्वीरेंनहीं
सरझुकाकरज़ुल्मसहनाभीसरासरज़ुल्महै
बख़्शवर्नाज़ुल्मकीकुछऔरतफ़्सीरेंनहीं
  - Bakhsh Layalpuri
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