hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dipendra Singh 'Raaz'
tum na tooto kabhi bhi isliye patthar hai kaha
tum na tooto kabhi bhi isliye patthar hai kaha | तुम न टूटो कभी भी इसलिए पत्थर है कहा
- Dipendra Singh 'Raaz'
तुम
न
टूटो
कभी
भी
इसलिए
पत्थर
है
कहा
मैं
तुम्हें
फूल
जो
कहता
तो
बिखर
जाती
तुम
- Dipendra Singh 'Raaz'
Download Sher Image
महीनों
फूल
भिजवाने
पड़े
थे
वो
पहली
बार
जब
रूठा
था
मुझ
से
Varun Anand
Send
Download Image
77 Likes
ये
तेरा
गुलिस्ताँ
तेरा
चमन
कब
मेरी
नवा
के
क़ाबिल
है
नग़्मा
मिरा
अपने
दामन
में
आप
अपना
गुलिस्ताँ
लाता
है
Ali Sardar Jafri
Send
Download Image
13 Likes
चूमा
था
एक
दिन
किसी
गुल
की
जबीन
को
लहजे
से
आज
तक
मेरे
ख़ुश्बू
नहीं
गई
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
39 Likes
होली
है
या
फिर
फूलों
का
मौसम
है
सब
के
चेहरों
पे
रंग
है
ख़ुशबू
भी
है
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
5 Likes
मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
Send
Download Image
25 Likes
छुआ
है
तुमने
भी
इक
रोज़
हमको
ये
ख़ुशबू
देर
तक
महका
करेगी
तुम्हारे
हाथ
सालों
तक
ये
दुनिया
हमारे
नाम
पे
चूमा
करेगी
Read Full
Ritesh Rajwada
Send
Download Image
25 Likes
ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
Send
Download Image
61 Likes
फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
Send
Download Image
5 Likes
तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
Send
Download Image
78 Likes
इन
हवाओं
में
ज़रा
सी
ख़ुशबू
हज़रत
घोलिए
थोड़ी
हिंदी
थोड़ी
सी
उर्दू
यहाँ
पर
बोलिए
Navneet krishna
Send
Download Image
6 Likes
Read More
छुपा
रहा
हूँ
मेरे
अश्क
आह
करते
हुए
जब
उसको
देख
रहा
हूँ
निकाह
करते
हुए
शब-ए-फ़िराक़
हुआ
था
जो
शे'र
मैंने
पढ़ा
तो
लोग
रोने
लगे
वाह
वाह
करते
हुए
यहाँ
तो
आँख
पे
पट्टी
बँधी
है
सब
के
मगर
ख़ुदा
तो
देख
रहा
है
गुनाह
करते
हुए
कसूरवार
अदालत
में
कर
दिया
उसने
सवाल
पर
मेरी
जानिब
निगाह
करते
हुए
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Download Image
1 Like
वो
इक
गली
जिसे
छोड़
हुए
मुझे
बरसों
न
जाने
क्यूँ
मेरे
ख़्वाबों
में
रोज़
आती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
किसी
की
लौट
आई
है
मुहब्बत
कोई
फिर
से
अकेला
पड़
गया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
और
तो
इस
सेे
ज़्यादा
हिज्र
में
होगा
भी
क्या
मैं
तड़पकर
मर
ही
तो
जाऊँँगा
शायद
एक
दिन
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
2 Likes
मुझको
मिला
है
मुफ़्त
में
ये
ग़म
ख़ुशी
के
साथ
आया
है
मेरे
ख़्वाब
में
वो
पर
किसी
के
साथ
साए
में
उसके
ऐसे
गुज़ारी
है
ज़िंदगी
जैसे
गुज़ारता
है
कोई
अजनबी
के
साथ
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
3 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Khwab Shayari
Bimar Shayari
Zindagi Shayari
Naqab Shayari
Aaina Shayari