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Afzal Ali Afzal
chooma tha ek din kisi gul ki jabeen ko
chooma tha ek din kisi gul ki jabeen ko | चूमा था एक दिन किसी गुल की जबीन को
- Afzal Ali Afzal
चूमा
था
एक
दिन
किसी
गुल
की
जबीन
को
लहजे
से
आज
तक
मेरे
ख़ुश्बू
नहीं
गई
- Afzal Ali Afzal
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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हज़ार
बर्क़
गिरे
लाख
आँधियाँ
उट्ठें
वो
फूल
खिल
के
रहेंगे
जो
खिलने
वाले
हैं
Sahir Ludhianvi
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उसकी
तरफ़
से
फूल
भी
आएँगे
एक
रोज़
पत्थर
उठा
के
चूम
ले
इसको
पहल
समझ
Munawwar Rana
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पत्ता
पत्ता
बूटा
बूटा
हाल
हमारा
जाने
है
जाने
न
जाने
गुल
ही
न
जाने
बाग़
तो
सारा
जाने
है
Meer Taqi Meer
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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सीने
में
मेरे
दिल
है,
पर
अब
उस
में
तू
नहीं
यानी
तिजोरी
तो
है
मगर
धन
नहीं
बचा
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Afzal Ali Afzal
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कौन
है
बच
गया
जो
उल्फ़त
से
अब
ख़ुदा
ही
बचाये
तोहमत
से
हो
गई
है
हवा
भी
ज़हरीली
ले
नहीं
सकते
साँस
राहत
से
तुम
मेरे
सामने
रहो
कुछ
वक़्त
आँख
भर
देख
लूँ
मोहब्बत
से
मुद्दतों
साथ
वो
रहा
मेरे
कुछ
बदलता
नहीं
है
सोहबत
से
तू
मेरी
दिलबरी
भी
देखेगा
आ
कभी
मुझ
को
मिलने
फ़ुरसत
से
तुम
मुझे
नफरतें
सिखाओ
मत
मुझ
को
फुरसत
नहीं
मोहब्बत
से
बाँटतें
हैं
मोहब्बतें
हर
सम्त
अपनी
बनती
नहीं
अदावत
से
इन
से
निस्बत
रखा
करो
"अफ़ज़ल"
"संत"
मिलते
हैं
अब
ग़नीमत
से
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Afzal Ali Afzal
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इतनी
बेचैनियाँ
हैं
इस
मन
में
रूह
घबरा
रही
है
अब
तन
में
शोर
बढ़ने
लगा
है
धड़कन
का
दर्द
क्यूँँ
चीख़ता
है
धड़कन
में
एक
तुम
ही
न
मिल
सके
हम
को
और
तो
सब
मिला
है
जीवन
में
पेड़
होते
थे
पहले,
लेकिन
अब
कुछ
दीवारें
उगी
हैं
आंगन
में
आई
मुद्दत
के
बाद
लब
पे
हँसी
आई
मुद्दत
में
नींद
नैनन
में
सोहबतें
अपना
क्या
बिगाड़ेंगी
सांप
पलते
हैं
ख़ूब
चंदन
में
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Afzal Ali Afzal
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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सुन
ओ
कहानीकार
कोई
ऐसा
रोल
दे
ऐसे
अदा
करूँं
मेरी
इज़्ज़त
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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