itni bechainiyaan hain is man men | इतनी बेचैनियाँ हैं इस मन  में

  - Afzal Ali Afzal
इतनीबेचैनियाँहैंइसमनमें
रूहघबरारहीहैअबतनमें
शोरबढ़नेलगाहैधड़कनका
दर्दक्यूँँचीख़ताहैधड़कनमें
एकतुमहीमिलसकेहमको
औरतोसबमिलाहैजीवनमें
पेड़होतेथेपहले,लेकिनअब
कुछदीवारेंउगीहैंआंगनमें
आईमुद्दतकेबादलबपेहँसी
आईमुद्दतमेंनींदनैननमें
सोहबतेंअपनाक्याबिगाड़ेंगी
सांपपलतेहैंख़ूबचंदनमें
  - Afzal Ali Afzal
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