usii ke zulm se main haalat-e-panaah men tha | उसी के ज़ुल्म से मैं हालत-ए-पनाह में था

  - Bakhsh Layalpuri
उसीकेज़ुल्मसेमैंहालत-ए-पनाहमेंथा
हरइकनफ़समिराजिसशख़्सकीपनाहमेंथा
चमकरहाथावोख़ुर्शीद-ए-दो-जहाँकीतरह
वोहाथजोकिगरेबान-ए-कज-कुलाहमेंथा
उफ़ुक़उफ़ुक़कोपयाम-ए-सहरदियामैंने
मिराक़यामअगरचेशब-ए-सियाहमेंथा
महकरहेथेनज़रमेंगुलाबसपनोंके
खुलीजोआँखतोदेखामैंक़त्ल-गाहमेंथा
मिरेहरीफ़मुझेरौंदकरनिकलसके
फ़सील-ए-संगकीसूरतखड़ामैंराहमेंथा
जोबातबातपेकरताथाइंक़लाबकीबात
सजीसलीबतोवोहामियान-ए-शाहमेंथा
अदूकीफ़ौजनेलूटातोक्यासितमयेहै
'रईस'-ए-शहरभीशामिलइसीसिपाहमेंथा
  - Bakhsh Layalpuri
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