asiraan-e-hawaadis ki giraa-jaani nahin jaati | असीरान-ए-हवादिस की गिराँ-जानी नहीं जाती

  - Bakhsh Layalpuri
असीरान-ए-हवादिसकीगिराँ-जानीनहींजाती
जहाँसेख़ून-ए-इंसानीकीअर्ज़ानीनहींजाती
दरोग़-ए-मस्लहतकेदेखकरआसारचेहरोंपर
हक़ीक़त-आश्नाआँखोंकीहैरानीनहींजाती
निशान-ए-ख़ुसरवीतोमिटगएहैंलौह-ए-आलमसे
कुलाह-ए-ख़ुसरवीसेबू-ए-सुल्तानीनहींजाती
अँधेराइसक़दरहैशहरपरछायासियासतका
किसीभीशख़्सकीअबशक्लपहचानीनहींजाती
ज़मानाकर्बलाकानामसुनकरकाँपउठताहै
अभीतकख़ून-ए-शब्बीरीकीजौलानीनहींजाती
फ़ुज़ूँ-तरऔरहोतेजारहेहैंचाकदामनके
रफ़ू-गरसेहमारीचाक-दामानीनहींजाती
येमानारौशनीकोपीगईज़ुल्मतजिहालतकी
मगरइसज़र्रा-ए-ख़ाकीकीताबानीनहींजाती
  - Bakhsh Layalpuri
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