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Bhaskar Shukla
makaan to hai nahin jo kheench den deewaar is dil men
makaan to hai nahin jo kheench den deewaar is dil men | मकाँ तो है नहीं जो खींच दें दीवार इस दिल में
- Bhaskar Shukla
मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
- Bhaskar Shukla
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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उनके
गेसू
खुलें
तो
यार
बने
बात
मेरी
इक
रबर
बैंड
ने
जकड़ी
हुई
है
रात
मेरी
Zubair Ali Tabish
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हम
से
कोई
तअल्लुक़-ए-ख़ातिर
तो
है
उसे
वो
यार
बा-वफ़ा
न
सही
बे-वफ़ा
तो
है
Jameel Malik
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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उसके
झुमके
की
बात
क्या
कीजे
उसकी
बातें
भी
यार
गहना
हैं
Gaurav Singh
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बातें
दवा
का
काम
कर
सकतीं
हैं
यार
बीमार
से
तुम
बात
करके
देखना
Shubhangi kalii
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यार
इक
बार
परिंदों
को
हुकूमत
दे
दो
ये
किसी
शहर
को
मक़्तल
नहीं
होने
देंगे
ये
जो
चेहरे
हैं
यहाँ
चाँद
से
चेहरे
'ताबिश'
ये
मिरा
इश्क़
मुकम्मल
नहीं
होने
देंगे
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Abbas Tabish
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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ये
भी
अच्छा
हुआ
मौत
ने
आकर
हमको
बचा
लिया
वरना
हालत
ऐसी
थी,
हम
शायर
भी
हो
सकते
थे
Bhaskar Shukla
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किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
Bhaskar Shukla
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ना
तो
कुछ
सुनते
हैं
ना
ही
बोल
कुछ
पाते
हैं
हम
सामने
उनके
सरापा
आँख
हो
जाते
हैं
हम
वो
निगाहें
इन
निगाहों
से
कभी
हटती
नहीं
वरना
कितनी
ही
निगाहें
हैं
जिन्हें
भाते
हैं
हम
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Bhaskar Shukla
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कुछ
एक
की
हम
जैसी
क़िस्मत
होती
है
बाकी
सब
की
अच्छी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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तुझको
देखा
था
जब
आख़िरी
बार
तो
क्या
पता
था
कि
ये
आख़िरी
बार
है
Bhaskar Shukla
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