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Bhaskar Shukla
kitaaben band karke jab main bistar par pahunchta hooñ
kitaaben band karke jab main bistar par pahunchta hooñ | किताबें बंद करके जब मैं बिस्तर पर पहुँचता हूँ
- Bhaskar Shukla
किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
- Bhaskar Shukla
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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बे-गिनती
बोसे
लेंगे
रुख़-ए-दिल-पसंद
के
आशिक़
तिरे
पढ़े
नहीं
इल्म-ए-हिसाब
को
Haidar Ali Aatish
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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किताबें
खोल
कर
बैठे
हैं
लेकिन
रिवीजन
बस
तुम्हारा
हो
रहा
है
Prateek Shukla
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जो
कुछ
मता-ए-हुनर
हो
तो
सामने
लाओ
कि
ये
ज़माना-ए-इज़हार-ए-नस्ल-ओ-रंग
नहीं
Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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लिक्खा
गया
न
कुछ
कभी
मुझ
सेे
जवाब
में
रक्खा
ही
रह
गया
है
तेरा
ख़त
किताब
में
Ankit Maurya
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कहाँ
हम
ग़ज़ल
का
हुनर
जानते
हैं
मगर
इस
ज़बाँ
का
असर
जानते
हैं
ये
वो
हुस्न
जिसको
निखारा
गया
है
नया
कुछ
नहीं
हम
ख़बर
जानते
हैं
कि
है
जो
क़फ़स
में
वो
पंछी
रिहा
हो
परिंदें
ज़मीं
के
शजर
जानते
हैं
फ़क़त
रूह
के
नाम
है
इश्क़
लेकिन
बदन
के
हवाले
से
घर
जानते
हैं
फ़ुलाँ
है
फ़ुलाँ
का
यक़ीं
हैं
हमें
भी
सुनो
हम
उसे
सर-ब-सर
जानते
हैं
कि
अब
यूँँ
सिखाओ
न
रस्म-ए-सियासत
झुकाना
कहाँ
है
ये
सर
जानते
हैं
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Neeraj Neer
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मुस्कुराहट
ओढ़कर
यूँँ
ही
नहीं
रहता
हूँ
मैं
झाँककर
देखो
कभी
अंदर
बहुत
टूटा
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
भर
का
तो
वा'दा
ज़िन्दगी
से
कर
लिया
हाँ
मगर
ऐ
मौत
!
उसके
बाद
बस
तेरा
हूँ
मैं
काश
!
झूठा
ही
सही,
वो
पूछता
कैसे
हो
तुम
मैं
भुला
देता
हर
इक
ग़म,
बोलता,
अच्छा
हूँ
मैं
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Bhaskar Shukla
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तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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कुछ
एक
की
हम
जैसी
क़िस्मत
होती
है
बाकी
सब
की
अच्छी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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छोड़ो
दुनिया
की
परवाहें,
करो
मोहब्बत
मुश्किल
हों
कितनी
भी
राहें,
करो
मोहब्बत
सुनकर
देखो
सारे
मंदिर
यही
कहेंगे
यही
कहेंगी
सब
दरगाहें,
करो
मोहब्बत
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Bhaskar Shukla
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