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Bhaskar Shukla
teraa likkha jo padhoon to teri awaaz sunoon
teraa likkha jo padhoon to teri awaaz sunoon | तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
- Bhaskar Shukla
तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
- Bhaskar Shukla
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ग़म
में
हम
सूरत-ए-गमख़ार
नहीं
पढ़ते
हैं
इसलिए
मीर
के
अश'आर
नहीं
पढ़ते
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
तस्वीर
से
जा
लगती
हैं
सुब्ह
उठकर
सभी
अख़बार
नहीं
पढ़ते
हैं
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Ashu Mishra
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भेज
देता
हूँ
मगर
पहले
बता
दूँ
तुझ
को
मुझ
से
मिलता
नहीं
कोई
मिरी
तस्वीर
के
बाद
Umair Najmi
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मेरे
अश'आर
पढ़ने
वाले
लोग
तेरी
तस्वीर
माँग
बैठे
हैं
Shadab Javed
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
रूठ
के
जाने
वाले
मैं
अभी
तक
तिरी
तस्वीर
लिए
बैठा
हूँ
Qaisar-ul-Jafri
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तेरा
चेहरा
सुब्ह
का
तारा
लगता
है
सुब्ह
का
तारा
कितना
प्यारा
लगता
है
तुम
से
मिल
कर
इमली
मीठी
लगती
है
तुम
से
बिछड़
कर
शहद
भी
खारा
लगता
है
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Kaif Bhopali
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जब
आँखों
में
लगाता
हूँ
तो
चुपके-चुपके
हंस-हंसकर
तेरी
तस्वीर
भी
कहती
है,
सूरत
ऐसी
होती
है
Dagh Dehlvi
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दर्द
चेहरा
पहन
के
आया
था
तेरा
चेहरा
था
सो
क़ुबूल
किया
Aslam Rashid
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बद-नज़र
से
कभी
नहीं
देखा
तेरी
तस्वीर
भी
कुँवारी
है
Bhavesh Pathak
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अपने
जैसी
कोई
तस्वीर
बनानी
थी
मुझे
मिरे
अंदर
से
सभी
रंग
तुम्हारे
निकले
Salim Saleem
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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मुस्कुराहट
ओढ़कर
यूँँ
ही
नहीं
रहता
हूँ
मैं
झाँककर
देखो
कभी
अंदर
बहुत
टूटा
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
भर
का
तो
वा'दा
ज़िन्दगी
से
कर
लिया
हाँ
मगर
ऐ
मौत
!
उसके
बाद
बस
तेरा
हूँ
मैं
काश
!
झूठा
ही
सही,
वो
पूछता
कैसे
हो
तुम
मैं
भुला
देता
हर
इक
ग़म,
बोलता,
अच्छा
हूँ
मैं
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Bhaskar Shukla
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वरना
तो
ये
दीवार-ओ-दर
लगता
है
तुम
होती
हो
घर
में
तो
घर
लगता
है
Bhaskar Shukla
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दबे
थे
जो
कहीं
दिल
में
अचानक
कल
निकल
आए
खुला
जब
एलबम
तो
कुछ
पुराने
पल
निकल
आए
Bhaskar Shukla
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दिन
गुज़रते
हैं
अब
किताबों
में
और
रातें
तुम्हारे
ख़्वाबों
में
जानता
हूँ
उसे
मैं
आहट
से
छुप
नहीं
पायेगा
हिजाबों
में
यार
जैसी
है
रंगत-ओ-ख़ुशबू
नाज़ुकी
कम
है
इन
गुलाबों
में
हम
भी
छानेंगे
ख़ाक
सेहरा
की
वो
नज़र
आ
गया
सराबों
में
वो
किसी
को
बुरा
नहीं
कहते
एक
अच्छाई
है
ख़राबों
में
कोई
ग़म
हो
तो
मीर
पढ़ते
हैं
हम
नहीं
डूबते
शराबों
में
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Bhaskar Shukla
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जो
कह
नहीं
सका
उसे
क़रीब
था
वो
जब
मेरे
वो
बात
शे'र
में
बदल
गई
तो
दूर
तक
गई
Bhaskar Shukla
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