kabhi aankhoñ pe kabhi sar pe bith | कभी आँखों पे कभी सर पे बिठाए रखना

  - Bakhsh Layalpuri
कभीआँखोंपेकभीसरपेबिठाएरखना
ज़िंदगीतल्ख़सहीदिलसेलगाएरखना
लफ़्ज़तोलफ़्ज़हैंकाग़ज़सेभीख़ुश्बूफूटे
सफ़हा-ए-वक़्तपेवोफूलखिलाएरखना
चाँदक्याचीज़हैसूरजभीउभरआएगा
ज़ुल्मत-ए-शबमेंलहूदिलकाजलाएरखना
हुर्मत-ए-हर्फ़पेइल्ज़ामआनेपाए
सुख़न-ए-हक़कोसर-ए-दारसजाएरखना
फ़र्शतोफ़र्शफ़लकपरभीसुनाईदेगा
मेरीआवाज़मेंआवाज़मिलाएरखना
कभीवोयादभीआएतोमलामतकरना
कभीउसशोख़कीतस्वीरबनाएरखना
'बख़्श'सीखाहैशहीदान-ए-वफ़ासेहमने
हाथकटजाएँअलममुँहसेउठाएरखना
  - Bakhsh Layalpuri
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