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Vikas Rana
sochta hooñ ki yuñ na ho ik din
sochta hooñ ki yuñ na ho ik din | सोचता हूँ कि यूँँ न हो इक दिन
- Vikas Rana
सोचता
हूँ
कि
यूँँ
न
हो
इक
दिन
ये
ज़मीं
कोई
आसमाँ
निकले
- Vikas Rana
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आसमाँ
इतनी
बुलंदी
पे
जो
इतराता
है
भूल
जाता
है
ज़मीं
से
ही
नज़र
आता
है
Waseem Barelvi
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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ऐ
आ
समाँ
किस
लिए
इस
दर्जा
बरहमी
हम
ने
तो
तिरी
सम्त
इशारा
नहीं
किया
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Ambreen Haseeb Ambar
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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वो
क़हर
था
कि
रात
का
पत्थर
पिघल
पड़ा
क्या
आतिशीं
गुलाब
खिला
आसमान
पर
Zafar Iqbal
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उसके
गालो
की
ख़ला
से
मेरा
बोसा
बिगड़ा
है
दूर
रक्खें
शोख़
बच्चो
को
सभी
दीवार
से
Raj
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तू
शाही
है
परवाज़
है
काम
तेरा
तिरे
सामने
आ
समाँ
और
भी
हैं
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Allama Iqbal
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ये
आसमाँ
में
कोई
बुत
बैठा
भी
है
कि
नईं
या
हम
ज़मीं
के
लोग
यूँँ
ही
चीखते
हैं
बस
Siddharth Saaz
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ऐ
आसमान
तेरी
इनायत
बजा
मगर
फ़स्लें
पकी
हुई
हों
तो
बारिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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तेरे
पहलू
या
दरमियाँ
निकले
एक
जाँ
है
कहाँ
कहाँ
निकले
इस
तरह
से
कभी
समेट
मुझे
मेरे
खुलने
पर
इक
जहाँ
निकले
सोचता
हूँ
यूँँ
न
हो
इक
दिन
ये
ज़मीं
कोई
आसमाँ
निकले
आ
तिरी
साँस
साँस
पी
लूँ
मैं
जिस्म
से
रूह
का
धुआँ
निकले
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Vikas Rana
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जाने
कितने
घटे-बढ़े
होंगे
मुद्दतें
हो
गईं
सितारे
गिने
Vikas Rana
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सोचना
भी
अजीब
आदत
है
ये
भी
तो
सोचने
की
सूरत
है
मैं
किसी
दूसरे
का
सौदा
हूँ
आप
के
पास
मेरी
क़ीमत
है
पहले
हंसने
पे
भी
न
राज़ी
थे
अब
उदासी
से
भी
शिकायत
है
अब
मुझे
आप
छोड़
जाइएगा
अब
मुझे
आपकी
ज़रूरत
है
आपका
हाथ
मांगता
हूँ
मैं
आप
के
हाथ
मेरी
किस्मत
है
मेरी
सिगरेट
पे
ऐतराज़
तुम्हें
क्या
मुझे
चूमने
की
हसरत
है
मौत
तो
पहला
मरतबा
है
फ़िक्र
ज़िन्दगी
दूसरी
सहूलत
है
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Vikas Rana
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मुझको
ये
मालूम
नहीं
था
तुम
सेे
मिलने
से
पहले
दोस्त
जल्दी
आँखें
भरने
वालों
के
मन
जल्दी
भर
जाते
हैं
Vikas Rana
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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