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Vikas Rana
sochna bhi ajeeb aadat hai
sochna bhi ajeeb aadat hai | सोचना भी अजीब आदत है
- Vikas Rana
सोचना
भी
अजीब
आदत
है
ये
भी
तो
सोचने
की
सूरत
है
मैं
किसी
दूसरे
का
सौदा
हूँ
आप
के
पास
मेरी
क़ीमत
है
पहले
हंसने
पे
भी
न
राज़ी
थे
अब
उदासी
से
भी
शिकायत
है
अब
मुझे
आप
छोड़
जाइएगा
अब
मुझे
आपकी
ज़रूरत
है
आपका
हाथ
मांगता
हूँ
मैं
आप
के
हाथ
मेरी
किस्मत
है
मेरी
सिगरेट
पे
ऐतराज़
तुम्हें
क्या
मुझे
चूमने
की
हसरत
है
मौत
तो
पहला
मरतबा
है
फ़िक्र
ज़िन्दगी
दूसरी
सहूलत
है
- Vikas Rana
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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ऐ
मुस्कुराते
शख़्स
हमारी
तरफ़
न
आ
वापिस
यहाँ
से
कोई
भी
हँस
कर
नहीं
गया
मुझको
तुम्हारे
बाद
किसी
और
की
तरफ़
ले
जा
रहा
था
मेरा
मुक़द्दर
नहीं
गया
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Inaam Azmi
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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इस
बेवफ़ाई
पर
मुझे
हैरत
नहीं
तुझको
पा
लूँ
ऐसी
मिरी
क़िस्मत
नहीं
Harsh saxena
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मैं
अब
तेरे
सिवा
किस
को
पुकारूँ
मुक़द्दर
सो
गया
ग़म
जागता
है
Asad Bhopali
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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घर
से
निकले
हुए
बेटों
का
मुक़द्दर
मालूम
माँ
के
क़दमों
में
भी
जन्नत
नहीं
मिलने
वाली
Iftikhar Arif
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शायद
अगली
इक
कोशिश
तक़दीर
बदल
दे
ज़हर
तो
जब
जी
चाहे
खाया
जा
सकता
है
Siraj Faisal Khan
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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हमने
चाहे
थे
अच्छे
दिन
तुम
सेे
तुमने
भी
अच्छे
दिन
दिखाए
हैं
Vikas Rana
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लो
रख
दी
जान
पलड़े
पर
तुम
अपनी
शा'इरी
रक्खो
Vikas Rana
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जाने
कितने
घटे-बढ़े
होंगे
मुद्दतें
हो
गईं
सितारे
गिने
Vikas Rana
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तुम्हारे
बाद
के
बोसों
में
जानाँ
तुम्हारी
सांस
की
ख़ुशबू
नहीं
थी
Vikas Rana
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तुम
भी
रोती
हुई
दिखाई
दो
मैंने
रोते
हुए
ये
चाहा
था
Vikas Rana
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