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Ritesh Rajwada
jeet hooñ jashne muqaddar hooñ main
jeet hooñ jashne muqaddar hooñ main | जीत हूँ जश्न-ए-मुक़द्दर हूँ मैं
- Ritesh Rajwada
जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
- Ritesh Rajwada
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जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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कभी
पत्थर
मुक़द्दर
लिख
नहीं
सकता
मगर
समझो
जिसे
पत्थर
में
ढूँढो
हो
तुम्हारे
पास
ही
तो
है
Tanha
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फिर
एक
रोज़
मुक़द्दर
से
हार
मानी
गई
ज़बीन
चूम
के
बोला
गया
"ख़ुदा
हाफ़िज़"
Afkar Alvi
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ख़ुद
बुलाओ
के
वो
यूँँ
घर
से
नहीं
निकलेगा
यहाँ
इनाम
मुक़द्दर
से
नहीं
निकलेगा
ऐसे
मौसम
में
बिना
काम
के
आया
हुआ
शख़्स
इतनी
जल्दी
तेरे
दफ़्तर
से
नहीं
निकलेगा
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Khurram Afaq
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ये
किस
ने
कहा
है
मिरी
तक़दीर
बना
दे
आ
अपने
ही
हाथों
से
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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तमाम
मस'अले
उठाए
फिर
रहे
हैं
हम
इसीलिए
भी
चलते
चलते
थक
गए
हैं
हम
थे
कितने
कम-नसीब
हम
कि
राबता
न
था
हैं
कितने
ख़ुशनसीब
तुझ
को
छू
रहे
हैं
हम
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Siddharth Saaz
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
न
थे
तुम
अगर
फूल
न
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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मैं
अब
तेरे
सिवा
किस
को
पुकारूँ
मुक़द्दर
सो
गया
ग़म
जागता
है
Asad Bhopali
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मौसम
की
रा'नाई
थे
हम
कच्ची
अमराई
थे
सब
वादों
ने
झूठ
कहा
सारे
ख़्वाब
हवाई
थे
गिरे
छिटक
के
दूर
हुए
हम
चुटकी
भर
राई
थे
मेरे
हिस्से
आए
जो
सब
के
सब
हरजाई
थे
मिल
के
भी
न
शाद
हुए
हम
दोनों
तन्हाई
थे
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Ritesh Rajwada
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अपनी
दुनिया
में
खोए
जाता
हूँ
कोई
पूछे
तो
मुस्कुराता
हूँ
एक
लड़की
है
जिसकी
ख़ातिर
मैं
ख़्वाब
में
तितलियाँ
उड़ाता
हूँ
उसका
चेहरा
बनाए
से
न
बने
इसलिए
खुशबुएँ
बनाता
हूँ
कल
मोहब्बत
में
फूल
आएँगे
अपने
आँसू
मैं
बोए
जाता
हूँ
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Ritesh Rajwada
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छुआ
है
तुमने
भी
इक
रोज़
हमको
ये
ख़ुशबू
देर
तक
महका
करेगी
तुम्हारे
हाथ
सालों
तक
ये
दुनिया
हमारे
नाम
पे
चूमा
करेगी
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Ritesh Rajwada
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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जिन
रस्तों
से
तुम
गुज़रे
हो
उन
रस्तों
को
ईद
मुबारक़
Ritesh Rajwada
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