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Khalid Sajjad
almas dhare rah jaate hain bikta hai to patthar bikta hai
almas dhare rah jaate hain bikta hai to patthar bikta hai | अलमास धरे रह जाते हैं बिकता है तो पत्थर बिकता है
- Khalid Sajjad
अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
- Khalid Sajjad
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मैं
अब
तेरे
सिवा
किस
को
पुकारूँ
मुक़द्दर
सो
गया
ग़म
जागता
है
Asad Bhopali
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कभी
पत्थर
मुक़द्दर
लिख
नहीं
सकता
मगर
समझो
जिसे
पत्थर
में
ढूँढो
हो
तुम्हारे
पास
ही
तो
है
Tanha
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सितारे
कुछ
बताते
हैं
नतीजा
कुछ
निकलता
है
बड़ी
हैरत
में
हैं
मेरा
मुक़द्दर
देखने
वाले
Madan Mohan Danish
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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ये
किस
ने
कहा
है
मिरी
तक़दीर
बना
दे
आ
अपने
ही
हाथों
से
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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मोहब्बत
अपनी
क़िस्मत
में
नहीं
है
इबादत
से
गुज़ारा
कर
रहे
है
Fahmi Badayuni
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परिंद
पेड़
से
परवाज़
करते
जाते
हैं
कि
बस्तियों
का
मुक़द्दर
बदलता
जाता
है
Asad Badayuni
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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ज़ब्त
का
ऐसे
इम्तिहान
न
ले
ऐ
मेरी
जान
मेरी
जान
न
ले
Khalid Sajjad
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मोहब्बतों
के
हर
इक
सम्त
शादियाने
थे
गुज़िश्तगा
के
ज़माने
भी
क्या
ज़माने
थे
सरों
पे
रात
जो
आई
हमें
ख़्याल
आया
हमें
चराग़
अभी
और
भी
जलाने
थे
मैं
उस
सेे
उसका
पता
पूछ
कर
भी
क्या
करता
हवा
के
अपने
भला
कौन
से
ठिकाने
थे
मैं
इसलिए
भी
वहाँ
नक्श-ए-पा
बना
आया
कि
मेरे
बाद
कईं
लोग
आने
जाने
थे
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Khalid Sajjad
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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