mashqat ka khazana maangata hai | मशक़्क़त का ख़ज़ाना माँगता है

  - Bakhsh Layalpuri
मशक़्क़तकाख़ज़ानामाँगताहै
मिरीमेहनतज़मानामाँगताहै
हरइकलम्हादिल-ए-आवारा-फ़ितरत
मसाफ़तकाख़ज़ानामाँगताहै
मुक़द्दरसेजिसेमाँगाथामैंने
उसेमुझसेज़मानामाँगताहै
अजबपागलहैमेरेमनकापंछी
क़फ़समेंआशियानामाँगताहै
हमेंहरआनआमादा-ए-हिज्रत
हमाराआब-ओ-दानामाँगताहै
सितमयेहैकिहमतिश्ना-लबोंसे
सितमगरआबयानामाँगताहै
हमारेशहरकामर्द-ए-सुबुक-सर
कुलाह-ए-ख़ुसरवानामाँगताहै
मिराहरइकमुनाफ़िक़यारमुझसे
ख़ुलूस-ए-दोस्तानामाँगताहे
  - Bakhsh Layalpuri
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