rut na badle to bhi afsurda shajar lagta hai | रुत न बदले तो भी अफ़्सुर्दा शजर लगता है

  - Bakhsh Layalpuri
रुतबदलेतोभीअफ़्सुर्दाशजरलगताहै
औरमौसमकेतग़य्युरसेभीडरलगताहै
दर्द-ए-हिजरतकेसताएहुएलोगोंकोकहीं
साया-ए-दरभीनज़रआएतोघरलगताहै
एकसाहिलहीथागिर्दाब-शनासापहले
अबतोहरदिलकेसफ़ीनेमेंभँवरलगताहै
बज़्म-ए-शाहीमेंवहीलोगसर-अफ़राज़हुए
जिनकेकाँधोंपेहमेंमोमकासरलगताहै
खालियाहैतोउसेदोस्तउगलतेक्यूँँहो
ऐसेपेड़ोंपेतोऐसाहीसमरलगताहै
अज्नबिय्यतकावोआलमहैकिहरआनयहाँ
अपनाघरभीहमेंअग़्यारकाघरलगताहै
शबकीसाज़िशनेउजालोंकागलाघूँटदिया
ज़ुल्मत-आबादसाअबनूर-ए-सहरलगताहै
मंज़िल-ए-सख़्तसेहमयूँँतोनिकलआएहैं
औरजोबाक़ीहैक़यामतकासफ़रलगताहै
घरभीवीरानालगेताज़ाहवाओंकेबग़ैर
बाद-ए-ख़ुश-रंगचलेदश्तभीघरलगताहै
  - Bakhsh Layalpuri
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