ataak-e-shab men sehar ke charaaghh raushan kar | अताक़-ए-शब में सहर के चराग़ रौशन कर

  - Bakhsh Layalpuri
अताक़-ए-शबमेंसहरकेचराग़रौशनकर
क़बा-ए-दिलहीनहींदिलकेदाग़रौशनकर
किसीतरीक़सेताज़ाहवागिरफ़्तमेंला
किसीसबीलसेअपनादिमाग़रौशनकर
मशाम-ए-जाँमेंबसाख़ैर-ओ-अम्नकीख़ुशबू
फिरइसमहकसेमोहब्बतकेबाग़रौशनकर
छिड़ककेख़ूनरग-ए-दिलहक़ीरज़र्रोंपर
सवाद-ए-मंज़िल-ए-जाँकेसुराग़रौशनकर
सलीबउठाकेकभीकूचा-ए-सितममेंभीचल
जुनूँकीलौसेभीदश्त-ए-चराग़रौशनकर
रह-ए-हयातमेंवहम-ओ-गुमाँकेसाएहैं
नज़रमेंअज़्म-ओ-यक़ींकेअयाग़रौशनकर
कभीतक़द्दुस-ए-इंसानकेतूगीतभीगा
कभीतोदिलमेंमोहब्बतकीआगरौशनकर
  - Bakhsh Layalpuri
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