mire har lafz ki tauqeer rahne ke li.e hai | मिरे हर लफ़्ज़ की तौक़ीर रहने के लिए है

  - Bakhsh Layalpuri
मिरेहरलफ़्ज़कीतौक़ीररहनेकेलिएहै
मैंवोज़िंदाहूँमिरीतहरीररहनेकेलिएहै
सितम-गरनेजोपहनाईमिरेदस्त-ए-तलबमें
येमतसमझोकिवोज़ंजीररहनेकेलिएहै
मिराआईना-ए-तसनीफ़देताहैगवाही
मिराहरनुक़्ता-ए-तफ़सीररहनेकेलिएहै
रहेगातोतेराज़ुल्मपररोज़-ए-अबदतक
हमारेदर्दकीजागीररहनेकेलिएहै
जिसेमीरनिगाहोंनेकभीदेखानहींहै
मिरेदिलमेंवहीतस्वीररहनेकेलिएहै
सर-ए-बातिलकियादो-लख़्तजिसनेभीजहाँमें
सलामतबसवहीशमशीररहनेकेलिएहै
जुनून-ए-शौक़तख़रीब-ए-जहाँमिटकररहेगा
मगरहरजज़्बा-ए-ता'मीररहनेकेलिएहै
लिक्खाशे'रकोईऔरसमझबैठेहैंनादाँ
अदबमेंहर्बा-ए-तश्हीररहनेकेलिएहै
गुज़रजाएँगेहमदार-ए-फ़नासे'बख़्श'लेकिन
हमारेशहरकीतासीररहनेकेलिएहै
  - Bakhsh Layalpuri
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