hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Subhan Asad
daali hai KHud pe zulm ki yuñ ik misaal aur
daali hai KHud pe zulm ki yuñ ik misaal aur | डाली है ख़ुद पे ज़ुल्म की यूँँ इक मिसाल और
- Subhan Asad
डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
- Subhan Asad
Download Sher Image
छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
Read Full
Salman Zafar
Send
Download Image
35 Likes
सर
पर
हवा-ए-ज़ुल्म
चले
सौ
जतन
के
साथ
अपनी
कुलाह
कज
है
उसी
बाँकपन
के
साथ
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
25 Likes
है
ये
कैसा
सितम
मौला
ये
हैं
दुश्वारियाँ
कैसी
जहाँ
पर
रोना
था
हमको
वहीं
पर
मुस्कुराना
है
Aqib khan
Send
Download Image
4 Likes
जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
Send
Download Image
22 Likes
ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
Send
Download Image
30 Likes
ज़ुल्म
फिर
ज़ुल्म
है
बढ़ता
है
तो
मिट
जाता
है
ख़ून
फिर
ख़ून
है
टपकेगा
तो
जम
जाएगा
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
25 Likes
ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
Read Full
Jaun Elia
Send
Download Image
47 Likes
सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
19 Likes
दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
Send
Download Image
24 Likes
ख़याल
में
भी
उसे
बे-रिदा
नहीं
किया
है
ये
ज़ुल्म
मुझ
सेे
नहीं
हो
सका
नहीं
किया
है
Ali Zaryoun
Send
Download Image
51 Likes
Read More
ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
Read Full
Subhan Asad
Send
Download Image
23 Likes
मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
Read Full
Subhan Asad
Send
Download Image
28 Likes
और
किस
शय
से
दाग़-ए-दिल
धोएँ
क्या
करें
गर
न
इस
क़दर
रोएँ
दिल
तो
पत्थर
बना
दिया
तू
ने
आरज़ू
किस
ज़मीन
में
बोएँ
हम
किसी
बात
से
नहीं
डरते
हम
ने
पाया
ही
क्या
है
जो
खोएँ
आज
फ़ुर्सत
मिली
हैं
मुद्दत
बअ'द
आओ!
तंगी-ए-वक़्त
पर
रोएँ
हम
यही
ख़्वाब
देखते
हैं
'असद'
उन
के
शाने
पे
रख
के
सर
सोएँ
Read Full
Subhan Asad
Download Image
1 Like
रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
Read Full
Subhan Asad
Send
Download Image
46 Likes
तूने
सोचा
भी
है
जानाँ
कि
तेरे
वादे
ने
कितनी
सदियों
से
नहीं
पहना
अमल
का
पैकर
Subhan Asad
Send
Download Image
16 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Aankhein Shayari
Shaam Shayari
Gunaah Shayari
Chaaragar Shayari
Sharm Shayari