एकगुड़ियाकीकईकठ-पुतलियोंमेंजानहै
आजशाइ'रयेतमाशादेखकरहैरानहै
ख़ाससड़केंबंदहैंतबसेमरम्मतकेलिए
येहमारेवक़्तकीसबसेसहीपहचानहै
एकबूढ़ाआदमीहैमुल्कमेंयायूँँकहो
इसअँधेरीकोठरीमेंएकरौशन-दानहै
मस्लहत-आमेज़होतेहैंसियासतकेक़दम
तूनसमझेगासियासततूअभीनादानहै
कलनुमाइशमेंमिलावोचीथड़ेपहनेहुए
मैंनेपूछानामतोबोलाकिहिंदुस्तानहै