ek gudiya ki kaii kath-putliyon men jaan hai | एक गुड़िया की कई कठ-पुतलियों में जान है

  - Dushyant Kumar
एकगुड़ियाकीकईकठ-पुतलियोंमेंजानहै
आजशाइ'रयेतमाशादेखकरहैरानहै
ख़ाससड़केंबंदहैंतबसेमरम्मतकेलिए
येहमारेवक़्तकीसबसेसहीपहचानहै
एकबूढ़ाआदमीहैमुल्कमेंयायूँँकहो
इसअँधेरीकोठरीमेंएकरौशन-दानहै
मस्लहत-आमेज़होतेहैंसियासतकेक़दम
तूसमझेगासियासततूअभीनादानहै
कलनुमाइशमेंमिलावोचीथड़ेपहनेहुए
मैंनेपूछानामतोबोलाकिहिंदुस्तानहै
  - Dushyant Kumar
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