shabo roz ki chaakri zindagi ki | शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की

  - Aman G Mishra
शबोरोज़कीचाकरीज़िन्दगीकी
मुयस्सरहुईंरोटियाँदोघड़ीकी
नहींकामआएँजोइकदिनमशीनें
ज़रूरतबनेआदमीआदमीकी
किकलशामफ़ुरसतमेंआईउदासी
बतादीमुझेक़ीमतेंहरख़ुशीकी
कियाक्याअमनजीनेबाइसबरसमें
कभीजीलियातोकभीख़ुद-कुशीकी
ग़मोंकोठिकानेलगातेलगाते
घड़ीगईआदमीकेग़मीकी
येसारीतपस्याकाकारणयहीहै
मिसालेंबनेंतोबनेंसादगीकी
  - Aman G Mishra
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