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Top 10 of
Sristi Singh
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Sristi Singh
याद
आती
है
तेरी
रुस्वाई
मौसमों
की
हसीन
पुरवाई
उन
दिनों
मुझ
में
तुम
फ़क़त
तुम
थे
आज
मुझ
में
है
बस
ये
तन्हाई
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Sristi Singh
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निगाहों
से
कहना
ये
बच
कर
रहेंगी
वो
शाइर
है
और
फिर
समाँ
ओढ़ती
है
Sristi Singh
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टूट
जाएँ
अगर
ये
खिलौने
अभी
रो
पड़ेंगे
ज़मीं
के
फ़रिश्ते
अभी
देखते
हो
तो
क्या
देखते
हो
भला
थक
गए
राह
घर
ये
दरीचे
अभी
लाख
ग़म
को
सँभालू
सँभलते
नहीं
दस्तरस
में
नहीं
हैं
उजाले
अभी
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Sristi Singh
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निगाहें
चीख
कर
जो
कुछ
भी
कहती
हैं
मिरे
ही
बीस
सालों
की
कमाई
है
Sristi Singh
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ख़मोशी
चूमता
है
सुर्ख़
होंठों
से
सो
उसके
आने
पे
चुप्पी
सजाई
है
Sristi Singh
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वफ़ा
में
आग
लग
जाए
तो
अच्छा
है
हँसी
ग़मगीन
करने
से
तो
अच्छा
है
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सभी
सौदागरों
के
ख़्वाब
होते
हैं
हो
दुख
मेरे
तराज़ू
पे
तो
अच्छा
है
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सभी
के
दिलों
में
कसक
सी
उठी
है
कि
क्यूँँ
आँख
उसकी
चमक
सी
उठी
है
कोई
खिड़कियाँ
खटखटा
कर
गया
है
मिरी
चूड़ियों
में
खनक
सी
उठी
है
वही
इश्क़
फिर
शोर
क्यूँँ
कर
रहा
है
बुझी
आग
फिर
क्यूँँ
दहक
सी
उठी
है
तिरे
लम्स
का
है
अभी
तक
असर
जाँ
बदन
से
मिरे
कुछ
महक
सी
उठी
है
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Sristi Singh
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मैं
कहूँगी
सभी
से
कि
फ़ुरसत
नहीं
दरमियाँ
तुम
नहीं
कोई
उल्फ़त
नहीं
चूमना
माथ
पे
और
लगना
गले
ख़्वाब
है
ये
मगर
मेरी
क़िस्मत
नहीं
ग़ौर
से
देख
लो
पुर
कशिश
ये
जहाँ
आज
की
रात
है
फिर
तो
क़ुर्बत
नहीं
हादसों
से
कहो
ये
बताएँ
वजह
जो
कुचल
कर
गया
है
वो
मूरत
नहीं
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Sristi Singh
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जब
मुसलसल
दुखों
का
समुंदर
बहे
ग़ैर
को
दुख
बताना
तभी
चाहिए
Sristi Singh
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