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Sristi Singh
nigaahon se kehna ye bach kar raheingi
nigaahon se kehna ye bach kar raheingi | निगाहों से कहना ये बच कर रहेंगी
- Sristi Singh
निगाहों
से
कहना
ये
बच
कर
रहेंगी
वो
शाइर
है
और
फिर
समाँ
ओढ़ती
है
- Sristi Singh
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कोई
अपना
नज़र
नहीं
आता
जब
तलक
मेरा
घर
नहीं
आता
ग़म
से
ज़्यादा
शराब
पीते
हैं
इश्क़
का
भी
हुनर
नहीं
आता
दिल
अँधेरे
में
ऐसे
डूबा
है
कि
यहाँ
रहगुज़र
नहीं
आता
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Sristi Singh
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सभी
सौदागरों
के
ख़्वाब
होते
हैं
हो
दुख
मेरे
तराज़ू
पे
तो
अच्छा
है
Sristi Singh
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सभी
ने
बताया
अना
ओढ़ती
है
मगर
यार
वो
तो
हया
ओढ़ती
है
ज़माना
सता
कर
उसे
ख़ुश
हुआ
है
वो
लड़की
जो
हर्फ़-ए-दुआ
ओढ़ती
है
बड़े
हर्फ़
से
शे'र
कहती
हूँ
मैं
फिर
मेरी
हर
ग़ज़ल
हौसला
ओढ़ती
है
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Sristi Singh
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मुझको
हर
ख़ौफ़
से
रिहा
कर
दो
या
तो
फिर
शाख़
से
हरा
कर
दो
रोज़
उसकी
ही
याद
आती
है
कुछ
नया
तुम
ही
हादसा
कर
दो
ज़ख़्म
सबके
ख़रीद
लूँगी
मैं
गर
उसे
मेरा
हमनवा
कर
दो
ऐसे
क़ातिल
को
क्या
कहेंगे
हम
जाने
दो
उसको
तुम
रिहा
कर
दो
गाहे
गाहे
मैं
मुस्कुराती
हूँ
मुझको
हर
पल
का
ग़म-ज़दा
कर
दो
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Sristi Singh
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टूट
जाएँ
अगर
ये
खिलौने
अभी
रो
पड़ेंगे
ज़मीं
के
फ़रिश्ते
अभी
देखते
हो
तो
क्या
देखते
हो
भला
थक
गए
राह
घर
ये
दरीचे
अभी
लाख
ग़म
को
सँभालू
सँभलते
नहीं
दस्तरस
में
नहीं
हैं
उजाले
अभी
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Sristi Singh
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