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Top 10 of
Amit Nandan Dev
Top 10 of
Amit Nandan Dev
हुनर
है
दिल
को
मुयस्सर
न
बद्दुआ
के
लिए
तबस्सुमात
भी
रक्खे
हैं
बस
सज़ा
के
लिए
Amit Nandan Dev
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तामीर
से
बस्ती
कोई
आबाद
नहीं
है
दीवार
गिरा
देने
से
रस्ता
नहीं
होता
Amit Nandan Dev
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मैं
तेरा
इंतिख़ाब
ले
बैठा
इश्क़
का
इक
सराब
ले
बैठा
थक
के
हर
एहतियात
छोड़
दिया
और
तुझ
से
हिसाब
ले
बैठा
कितनी
सदियों
से
दिल
भटकता
था
तू
मिला
और
ख़्वाब
ले
बैठा
तेरी
ख़ुशबू
में
था
जुनूँ
कोई
मैं
ग़लत
इक
गुलाब
ले
बैठा
मैं
जिसे
बंदगी
समझता
था
वो
किसी
की
शबाब
ले
बैठा
रात
उस
ने
जवाब
क्या
भेजा
मैं
सहर
में
अजाब
ले
बैठा
ख़ुद
को
ढूँढा
तो
तेरा
नाम
आया
जैसे
मैं
इक
ख़िताब
ले
बैठा
इश्क़
का
मसअला
सुलझता
क्या
फ़लसफ़ा
बे-हिसाब
ले
बैठा
देव
मंसूब
कर
लिया
किस
को
कौन
था
क्या
नक़ाब
ले
बैठा
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Amit Nandan Dev
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वफ़ा
की
बात
करें
या
सज़ा
की
ज़िक्र
करें
कि
दोनों
हुक़्म
में
थे
और
साथ
साथ
चले
Amit Nandan Dev
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ग़ज़ल
में
ज़ख़्म
खिलते
थे
क़लम
था
एक
ख़ूँ
कोई
हुनर
भी
मेरे
अश्कों
का
समझता
था
जुनूँ
कोई
Amit Nandan Dev
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ज़हर
में
लिपटी
हुई
बातों
से
मैं
महफ़ूज़
था
अब
तअल्लुक़
भी
निभाया
है
तो
तर्ज़-ए-इश्क़
से
Amit Nandan Dev
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क्या
बताऊँ
मैं
तुझको
क्या
है
ग़म
जान
लेवा
है
और
दवा
है
ग़म
किस
सेे
पूछूँ
के
क्या
मिला
है
ग़म
हर
किसी
ने
यही
कहा
है
ग़म
किस
सेे
पूछें
कि
क्यूँ
ये
मिलता
है
हर
तरफ़
है
हर
इक
जज़ा
है
ग़म
ग़म
नहीं
है
तो
शा'इरी
क्या
है
माहियत
हर
फ़न-ओ-सदा
है
ग़म
वक़्त
सुनता
नहीं
है
दर्द
मेरा
शा'इरी
बन
के
बोलता
है
ग़म
मैं
ने
चाहा
था
दर्द
से
राहत
उस
ने
हँस
कर
कहा
वफ़ा
है
ग़म
मैंने
सोचा
था
इश्क़
जी
लेगा
पर
उसी
की
तो
बद्दुआ
है
ग़म
ग़म
ही
ग़म
है
जहाँ
नज़र
जाए
शहर
भर
में
ये
फैलता
है
ग़म
ग़म
है
अंदाज़
ग़म
है
सूरत
भी
कभी
साया
कभी
सबा
है
ग़म
ग़म
ही
माशूक़
ग़म
ही
'आशिक़
है
यानी
ख़ुद
अपनी
इब्तिला
है
ग़म
ग़म
से
बढ़
कर
कोई
नहीं
अपना
दूर
हो
तो
लगे
ख़फ़ा
है
ग़म
गर
इबादत
में
चैन
मिलता
है
फिर
भी
दिल
को
बहुत
बुरा
है
ग़म
तर्क
कर
दूँ
अगर
तवक़्क़ो
को
फिर
बताऊँ
कहाँ
बचा
है
ग़म
ऐसा
दुश्मन
कहाँ
मिलेगा
फिर
दोस्ती
भी
है
बद्दुआ
है
ग़म
जिसको
चाहा
उसी
ने
छोड़ा
है
अब
तो
बस
मेरा
आसरा
है
ग़म
'देव'
भी
अब
सँभल
नहीं
पाते
कहीं
दिल
में
जो
आ
बसा
है
ग़म
हम
भी
अपनी
तरह
के
है
''आशिक़
जिसको
छू
जाए
रहनुमा
है
ग़म
'देव'
अब
तो
दु'आ
में
ग़म
माँगे
तेरे
होने
की
इन्तिहा
है
ग़म
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Amit Nandan Dev
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बिछड़
कर
लोग
अक्सर
भूल
जाते
हैं
ये
दुनिया
भी
हमें
हर
मोड़
पे
तेरा
इशारा
याद
रहता
है
Amit Nandan Dev
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न
गुल
खिले
न
सितारों
से
रौशनी
उतरी
तेरे
बग़ैर
कोई
रात
भी
कहाँ
गुज़री
Amit Nandan Dev
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लबों
पे
आग
निगाहों
में
रक्स-ए-ख़्वाब
लिए
हम
आ
गए
हैं
मोहब्बत
की
इक
किताब
लिए
Amit Nandan Dev
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