hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Qamar Saqi
is li.e har taraf andhera hai
is li.e har taraf andhera hai | इस लिए हर तरफ़ अँधेरा है
- Qamar Saqi
इस
लिए
हर
तरफ़
अँधेरा
है
इस
इलाक़े
का
चाँद
बूढ़ा
है
ऐ
ख़लाओं
में
चीख़ने
वाले
तू
मिरी
ख़ामुशी
का
बेटा
है
ऐ
हसीं
सब्ज़
जिस्म
के
मालिक
ये
बता
फूल
कब
महकता
है
तुम
'क़मर'
जिस
में
डूब
जाते
हो
उस
समुंदर
में
एक
रस्ता
है
- Qamar Saqi
Download Ghazal Image
क्या
तकल्लुफ़
करें
ये
कहने
में
जो
भी
ख़ुश
है
हम
उस
से
जलते
हैं
Jaun Elia
Send
Download Image
105 Likes
शब-ए-हिज्रां
बुझा
बैठी
हूँ
मैं
सारे
सितारे
पर
कोई
फ़ानूस
रौशन
है
ख़मोशी
से
मेरे
अंदर
Kiran K
Send
Download Image
1 Like
ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
Send
Download Image
24 Likes
तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
Send
Download Image
3 Likes
आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
Read Full
Ashu Mishra
Send
Download Image
38 Likes
एक
दिन
मेरी
ख़ामुशी
ने
मुझे
लफ़्ज़
की
ओट
से
इशारा
किया
Anjum Saleemi
Send
Download Image
30 Likes
मेरे
होंटों
पे
ख़ामुशी
है
बहुत
इन
गुलाबों
पे
तितलियाँ
रख
दे
Shakeel Azmi
Send
Download Image
28 Likes
फिर
ख़मोशी
ने
साज़
छेड़ा
है
फिर
ख़यालात
ने
ली
अँगड़ाई
Javed Akhtar
Send
Download Image
28 Likes
ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
Read Full
Vishal Singh Tabish
Send
Download Image
62 Likes
भाई
बहनों
की
मोहब्बत
का
नशा
मत
पूछिए
बे-तकल्लुफ़
हो
गए
तो
गुदगुदी
तक
आ
गए
Iftikhar Falak Kazmi
Send
Download Image
31 Likes
Read More
किस
की
ख़्वाहिश
में
जल
रहा
है
बदन
मोम
जैसा
पिघल
रहा
है
बदन
धीरे
धीरे
बदल
रहे
हैं
ख़याल
रफ़्ता
रफ़्ता
बदल
रहा
है
बदन
दुख
के
काँटों
पे
सो
रहा
हूँ
मैं
ग़म
के
शो'लों
पे
जल
रहा
है
बदन
हुस्न-ए-पुर-नूर
से
लिपटने
को
पागलों
सा
मचल
रहा
है
बदन
सज
पे
खिल
रहे
हैं
वस्ल
के
फूल
रात
पे
इत्र
मल
रहा
है
बदन
सुब्ह
होने
को
है
'क़मर'
साहब
इक
बदन
से
निकल
रहा
है
बदन
Read Full
Qamar Saqi
Download Image
0 Likes
आख़िरश
दर्द
या
दवा
था
मैं
ज़िंदगी
तू
बता
कि
क्या
था
मैं
मैं
कभी
इक
जगह
रुका
ही
नहीं
ऐसा
लगता
है
कि
हवा
था
मैं
हाँ
मुझे
ख़ुद
को
ज़ेर
करना
पड़ा
अपने
रास्ते
में
आ
रहा
था
मैं
ऐ
'क़मर'
अब
मुझे
भी
याद
नहीं
आख़िरी
बार
कब
हँसा
था
मैं
Read Full
Qamar Saqi
Download Image
0 Likes
बुलंद-ओ-पस्त
को
हमवार
कर
के
आया
हूँ
मैं
आसमाँ
पे
ज़मीं
से
उतर
के
आया
हूँ
हज़ार
जिस्म
के
दरिया
थे
मेरी
राहों
में
न
जाने
कितने
भँवर
पार
कर
के
आया
हूँ
वो
इक
मज़ाक़
जिसे
लोग
इश्क़
कहते
हैं
मैं
उस
मज़ाक़
का
जुर्माना
भर
के
आया
हूँ
अब
इस
से
आगे
ख़ुदा
जाने
कब
बिखर
जाऊँ
यहाँ
तलक
तो
बहुत
बन
सँवर
के
आया
हूँ
Read Full
Qamar Saqi
Download Image
0 Likes
अभी
तक
आँख
से
लिपटे
हुए
हैं
वो
हंगा
में
जो
अन-देखे
हुए
हैं
तुम्हारे
होश
तो
सालिम
हैं
लेकिन
हमारे
बाल
तो
बिखरे
हुए
हैं
सफ़र
का
वक़्त
रौशन
हो
रहा
है
बदन
पे
रास्ते
उभरे
हुए
हैं
बहादुर
इस
तजस्सुस
में
हैं
ग़लताँ
हमारे
सर
कहाँ
रक्खे
हुए
हैं
चराग़ो
किस
से
इतना
डर
रहे
हो
हवा
के
दाँत
तो
टूटे
हुए
हैं
Read Full
Qamar Saqi
Download Image
0 Likes
इक
दबे
अक्स
को
उकेरा
जाए
उस
के
काँधे
पे
हाथ
फेरा
जाए
तोड़
कर
अब
शनावरी
के
उसूल
रात
भर
बिस्तरों
पे
तैरा
जाए
चंद
जिस्मों
को
धूप
में
रख
कर
आज
परछाइयों
को
घेरा
जाए
अब
मिरी
दौड़ने
की
ख़्वाहिश
है
फ़र्श
पे
आग
को
बिखेरा
जाए
Read Full
Qamar Saqi
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Love Shayari
Zindagi Shayari
Paani Shayari
Khamoshi Shayari
Radha Krishna Shayari