buland-o-past ko hamvaar kar ke aaya hooñ | बुलंद-ओ-पस्त को हमवार कर के आया हूँ

  - Qamar Saqi
बुलंद-ओ-पस्तकोहमवारकरकेआयाहूँ
मैंआसमाँपेज़मींसेउतरकेआयाहूँ
हज़ारजिस्मकेदरियाथेमेरीराहोंमें
जानेकितनेभँवरपारकरकेआयाहूँ
वोइकमज़ाक़जिसेलोगइश्क़कहतेहैं
मैंउसमज़ाक़काजुर्मानाभरकेआयाहूँ
अबइससेआगेख़ुदाजानेकबबिखरजाऊँ
यहाँतलकतोबहुतबनसँवरकेआयाहूँ
  - Qamar Saqi
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