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Kiran K
shab-e-hijraan bujha baithi hooñ main saare sitaare par
shab-e-hijraan bujha baithi hooñ main saare sitaare par | शब-ए-हिज्रां बुझा बैठी हूँ मैं सारे सितारे पर
- Kiran K
शब-ए-हिज्रां
बुझा
बैठी
हूँ
मैं
सारे
सितारे
पर
कोई
फ़ानूस
रौशन
है
ख़मोशी
से
मेरे
अंदर
- Kiran K
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ख़ामोशी
में
आवाज़
का
किरदार
कोई
है
जो
बोलता
रहता
है
लगातार,
कोई
है
Shakeel Gwaliari
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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ये
पानी
ख़ामुशी
से
बह
रहा
है
इसे
देखें
कि
इस
में
डूब
जाएँ
Ahmad Mushtaq
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फिर
ख़मोशी
ने
साज़
छेड़ा
है
फिर
ख़यालात
ने
ली
अँगड़ाई
Javed Akhtar
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नए
किरदार
आते
जा
रहे
हैं
मगर
नाटक
पुराना
चल
रहा
है
Rahat Indori
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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एक
दिन
मेरी
ख़ामुशी
ने
मुझे
लफ़्ज़
की
ओट
से
इशारा
किया
Anjum Saleemi
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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छुआ
था
नाम
कभी
मेरी
क़लम
ने
उसका
तभी
से
मीरा
बनी
लिख
रही
है
बस
उसको
Kiran K
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चाहते
थे
टूटकर
जिनको
कभी
देखकर
यकजा
वो
हैरां
है
हमें
Kiran K
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ज़िन्दगी
रुख़
पर
जो
तेरे
छाई
है
यह
ख़ामुशी
आ
इसे
मैं
चीर
दूँ
पाज़ेब
की
झंकार
से
Kiran K
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सुकून
ए
क़ल्ब
होता
है
मुयस्सर
तेरा
जब
नाम
आता
है
लबों
पर
Kiran K
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मोजिज़ा
कुछ
तो
है
उसकी
आवाज़
में
ज़िन्दगी
यूँँ
नहीं
ख़ुश-नवा
है
मिरी
Kiran K
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