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Jaun Elia
kya takalluf karen ye kehne men
kya takalluf karen ye kehne men | क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
- Jaun Elia
क्या
तकल्लुफ़
करें
ये
कहने
में
जो
भी
ख़ुश
है
हम
उस
से
जलते
हैं
- Jaun Elia
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शब-ए-हिज्रां
बुझा
बैठी
हूँ
मैं
सारे
सितारे
पर
कोई
फ़ानूस
रौशन
है
ख़मोशी
से
मेरे
अंदर
Kiran K
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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हम
त'अल्लुक़
जिसे
समझते
थे
वो
त'अल्लुक़
नहीं
तकल्लुफ़
था
Akash Rajpoot
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ये
पानी
ख़ामुशी
से
बह
रहा
है
इसे
देखें
कि
इस
में
डूब
जाएँ
Ahmad Mushtaq
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मेरे
होंटों
पे
ख़ामुशी
है
बहुत
इन
गुलाबों
पे
तितलियाँ
रख
दे
Shakeel Azmi
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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उसे
बेचैन
कर
जाऊँगा
मैं
भी
ख़मोशी
से
गुज़र
जाऊँगा
मैं
भी
Ameer Qazalbash
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भले
ही
जान-लेवा
हो
सियासत
को
ग़लत
कहना
मगर
फिर
भी
ये
सच
ईमान
वाले
लोग
कहते
हैं
Amaan Pathan
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नए
किरदार
आते
जा
रहे
हैं
मगर
नाटक
पुराना
चल
रहा
है
Rahat Indori
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वहाँ
पहले
ही
आवाज़ें
बहुत
थीं
सो
मैं
ने
चुप
कराया
ख़ामुशी
को
Abhishek shukla
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बहुत
नज़दीक
आती
जा
रही
हो
बिछड़ने
का
इरादा
कर
लिया
क्या
Jaun Elia
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ये
ख़राबातियान-ए-ख़िरद-बाख़्ता
सुब्ह
होते
ही
सब
काम
पर
जाएँगे
Jaun Elia
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मुझ
से
अब
लोग
कम
ही
मिलते
हैं
यूँँ
भी
मैं
हट
गया
हूँ
मंज़र
से
Jaun Elia
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अपनी
महरूमियाँ
छिपाते
हैं
हम
गरीबों
की
आन
बान
में
क्या
Jaun Elia
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इक
हुस्न-ए-बेमिसाल
की
तम्सील
के
लिए
परछाइयों
पे
रंग
गिराता
रहा
हूँ
मैं
Jaun Elia
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