jo faqat rahte hon din ko be-qaraar | जो फ़क़त रहते हों दिन को बे-क़रार

  - Jagdeesh Raj Figar
जोफ़क़तरहतेहोंदिनकोबे-क़रार
महवशोंमेंकीजिएउनकाशुमार
जिसपेसहवनहोगयामेरानुज़ूल
ज़ातउसकीहोगईबसआब-दार
वोमिरीसाँसोंकेरस्तेहोलिया
जोउठादिलसेकभीगर्द-ओ-ग़ुबार
ख़ालिक़-ए-कौनैनसेक्यावास्ता
जबमिराकिरदारठहराकिर्दगार
दिनकोहूँमैंगर्मशबकोसर्दहूँ
मेरीहस्तीक्यानहींहैरेग-ज़ार
कश्मकशजारीहैजोअफ़्लाकमें
देखिएहासिलहोकिसकोइक़्तिदार
औरभीतोहैंयहाँकितनेमुक़ीम
पाँवधरतीपरतूइतनेपसार
मौतसेकहदोइसमेंदख़्लदे
ज़ीस्तसेहैरब्तमेराउस्तुवार
मौतकापहलेहीपरतवदेखलूँ
दिलकेदर्पनपरहैउसकाइंहिसार
एकसूखाखेतहैवोजिसजगह
मैंवहाँहूँआब-जूकारहगुज़ार
येजोआलमहैकभीइकदेसथा
इससेकटकरबनगएकितनेदयार
ख़ाकहूँयामोमहूँक्याइम्तियाज़
शम-ए-महफ़िलहूँकिहूँशम-ए-मज़ार
हब्सकेज़िंदानमेंरक्खाहैक्यूँ
मैंतोज़िंदानीनहींहूँ'फ़िगार'
  - Jagdeesh Raj Figar
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