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ATUL SINGH
bichhad kar mujhse tujhko kya mila hai
bichhad kar mujhse tujhko kya mila hai | बिछड़ कर मुझ सेे तुझको क्या मिला है
- ATUL SINGH
बिछड़
कर
मुझ
सेे
तुझको
क्या
मिला
है
कि
जो
कुछ
था
वो
भी
खोना
पड़ा
है
गया
था
जिस
जगह
पर
छोड़
कर
तू
उसी
रस्ते
पे
दिल
अब
भी
खड़ा
है
- ATUL SINGH
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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तुम
सेे
बिछड़
के
हम
को
यही
लग
रहा
है
अब
जैसे
मिटा
दिया
है
ख़ुदा
ने
लिखा
हुआ
Siddharth Saaz
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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तुम्हारा
बैग
भी
तय्यार
कर
के
रक्खा
है
अकेली
हिज्र
के
आज़ार
क्यूँ
उठाऊँ
मैं
Zahraa Qarar
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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गुल
कि
गुलशन
को
सुना
है
तुम
चुराना
चाहते
हो
आज
फिर
मुझ
को
गले
से
तुम
लगाना
चाहते
हो
ATUL SINGH
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जानता
हूँ
कि
हवाएँ
तुझे
बहकाती
हैं
जा
चराग़ों
की
तरह
तू
भी
उजाला
कर
दे
ATUL SINGH
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हमेशा
बे-वफ़ा
कहते
हो
उसको
तुम
मगर
उसने
तुम्हें
दुख-ग़म
दिया
क्या
है
मोहब्बत
ही
नहीं
कर
पाया
वो
तुम
सेे
तुम्हें
मजबूरियाँ
उसकी
पता
क्या
है
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ATUL SINGH
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मुसलसल
काटते
हो
और
फिर
काग़ज़
बनाते
हो
बड़े
ही
बेशर्म
हो
पेड़
भी
तुम
ख़ुद
लगाते
हो
ATUL SINGH
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लोग
कहते
हैं
ख़ुदा
सबकुछ
नहीं
देता
है
सबको
इसलिए
शायद
तुम्हें
उसने
लिया
है
छीन
मुझ
सेे
ATUL SINGH
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