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ATUL SINGH
log kahte hain KHuda sabkuchh nahin deta hai sabko
log kahte hain KHuda sabkuchh nahin deta hai sabko | लोग कहते हैं ख़ुदा सबकुछ नहीं देता है सबको
- ATUL SINGH
लोग
कहते
हैं
ख़ुदा
सबकुछ
नहीं
देता
है
सबको
इसलिए
शायद
तुम्हें
उसने
लिया
है
छीन
मुझ
सेे
- ATUL SINGH
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देवताओं
का
ख़ुदास
होगा
काम
आदमी
को
आदमी
दरकार
है
Firaq Gorakhpuri
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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थे
ख़ुदा
को
मानने
वाले
बड़ी
तादाद
में
है
तअज्जुब
पर
ख़ुदा
की
मानता
कोई
न
था
Rao Nasir
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तुम्हारा
तो
ख़ुदास
राबता
है
तो
देखो
ना,
हमारे
दुख
बता
कर
Siddharth Saaz
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सर
झुकाओगे
तो
पत्थर
देवता
हो
जाएगा
इतना
मत
चाहो
उसे
वो
बे-वफ़ा
हो
जाएगा
Bashir Badr
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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ख़ुदा
की
शा'इरी
होती
है
औरत
जिसे
पैरों
तले
रौंदा
गया
है
तुम्हें
दिल
के
चले
जाने
पे
क्या
ग़म
तुम्हारा
कौन
सा
अपना
गया
है
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Ali Zaryoun
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वक़्त
ए
इफ़्तार
ख़ुद
रब
था
मेरे
क़रीब
तुझ
से
बढ़
कर
मगर
कुछ
न
माँगा
गया
Afzal Ali Afzal
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रहता
है
इबादत
में
हमें
मौत
का
खटका
हम
याद-ए-ख़ुदा
करते
हैं
कर
ले
न
ख़ुदा
याद
Akbar Allahabadi
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इश्क़
सबको
है
मगर
सब
तो
वफ़ा
करते
नहीं
हैं
टूटता
दिल
है
मगर
सब
प्यार
में
मरते
नहीं
हैं
ATUL SINGH
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सभी
को
इश्क़
यारी
लग
रही
है
सो
ये
आदत
तुम्हारी
लग
रही
है
बिछड़ने
का
इरादा
कैसे
कर
लूँ
तू
अब
भी
उतनी
प्यारी
लग
रही
है
वो
मिलता
है
मगर
नज़रें
झुकाकर
बदन
की
पहरे-दारी
लग
रही
है
ये
किसने
हाल
पूछा
है
हमारा
ये
किसको
ग़म-गुसारी
लग
रही
है
नहीं
ये
हिज्र
के
आँसू
नहीं
हैं
ये
कोई
बर्फ़बारी
लग
रही
है
कोई
शीशा
यहाँ
टूटा
नहीं
है
मुझे
ये
दिल
फ़िगारी
लग
रही
है
वो
फिर
है
तोड़ने
निकली
दिलों
को
अतुल
बारी
तुम्हारी
लग
रही
है
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ATUL SINGH
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मैं
उसे
क्यूँ
भूल
जाऊँ
वो
बुरा
भी
तो
नहीं
है
कल
ही
रूठा
है
अभी
मुझ
सेे
मिला
भी
तो
नहीं
है
ATUL SINGH
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तुम
धरा
पर
बैठ
कर
सपने
गगन
के
पालते
हो
है
विजय
की
चाह
तो
क्यूँ
काम
कल
पर
टालते
हो
और
अंदाज़ा
नदी
का
छोर
पर
मिलता
नहीं
है
कूद
कर
देखो
न
डर
क्यूँ
डूबने
का
पालते
हो
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ATUL SINGH
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तुम्हारी
यादें
हैं
सो
कैसे
इनको
भूल
जाएँ
हम
भला
कोई
हवा
के
बिन
जिया
है
और
जी
सकता
है
ATUL SINGH
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