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ATUL SINGH
tum dhara par baith kar sapne gagan ke paalte ho
tum dhara par baith kar sapne gagan ke paalte ho | तुम धरा पर बैठ कर सपने गगन के पालते हो
- ATUL SINGH
तुम
धरा
पर
बैठ
कर
सपने
गगन
के
पालते
हो
है
विजय
की
चाह
तो
क्यूँ
काम
कल
पर
टालते
हो
और
अंदाज़ा
नदी
का
छोर
पर
मिलता
नहीं
है
कूद
कर
देखो
न
डर
क्यूँ
डूबने
का
पालते
हो
- ATUL SINGH
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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न
रूई
हो
तो
अपने
अश्कों
से
बाती
बनाएँगे
बुझा
दीया
हमारा
तो
हवा
से
लड़
भी
जाएँगे
बनाई
रोज़
चौदह
साल
रंगोली
बस
इस
ख़ातिर
न
जाने
रामजी
वनवास
से
कब
लौट
आएंँगे
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Krishnakant Kabk
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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आतिशीं
नज़रों
से
क्यूँँ
देख
डराओ
उसको
बे-वफ़ा
कह
के
न
इल्ज़ाम
लगाओ
उसको
उसने
छोड़ा
है
जो
कुछ
तो
कमी
मुझ
में
होगी
अपनी
नफ़रत
मेरे
यारों
न
दिखाओ
उसको
वो
जहाँ
भी
हो
ख़ुदा
उसको
सलामत
रखना
जो
मेरा
हाल
है
वो
हाल
न
लाओ
उसको
मीर
वो
भूले
हैं
हम
नाम
न
लेंगे
लेकिन
ख़ाक
मत
डालो
न
ही
आग
लगाओ
उसको
इतना
दिलकश
भी
सुख़न-वर
नहीं
हैं
यारों
अतुल
दूर
से
देखिए
दिल
से
न
लगाओ
उसको
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ATUL SINGH
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तोहफ़ा
मुझे
वफ़ा
का
बस
इक
अता
करे
वो
अपना
मुझे
बना
ले
या
फिर
जुदा
करे
वो
ATUL SINGH
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कसर
उसने
न
छोड़ी
कोई
मेरा
दिल
दुखाने
में
वो
अपनी
हद
से
नीचे
गिर
गया
मुझको
गिराने
में
ATUL SINGH
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आप
जो
कुछ
भी
कहे
मुझ
से
वो
सब
कुछ
ही
सही
है
इश्क़
भोला
है
मेरा
इतना,
मगर
अंधा
नहीं
है
ATUL SINGH
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हम
ऐसा
इश्क़
करने
जा
रहे
हैं
जिसे
करके
सभी
पछता
रहे
हैं
हमीं
हैं
जो
कि
सबको
जानते
थे
हमीं
अब
सब
सेे
धोखा
खा
रहे
हैं
वफ़ा
के
वादे
वो
करती
है
हरदम
सो
सारे
वादे
हम
लिखवा
रहे
हैं
क़रीब
इतने
हैं
कैसे
लें
न
बोसा
सितम
ये
है
कि
वो
शर्मा
रहे
हैं
कहाँ
फ़ुर्सत
उन्हें
हमको
मनाएँ
हम
अपने
दिल
को
ख़ुद
समझा
रहे
हैं
यही
हर
बार
का
जुमला
है
उसका
सुनो
माँ
घर
पे
है
हम
जा
रहे
हैं
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ATUL SINGH
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