hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Krishnakant Kabk
na rooi ho to apne ashkon se baati banaaenge
na rooi ho to apne ashkon se baati banaaenge | न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे
- Krishnakant Kabk
न
रूई
हो
तो
अपने
अश्कों
से
बाती
बनाएँगे
बुझा
दीया
हमारा
तो
हवा
से
लड़
भी
जाएँगे
बनाई
रोज़
चौदह
साल
रंगोली
बस
इस
ख़ातिर
न
जाने
रामजी
वनवास
से
कब
लौट
आएंँगे
- Krishnakant Kabk
Download Sher Image
बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
Send
Download Image
31 Likes
यहाँ
मज़बूत
से
मज़बूत
लोहा
टूट
जाता
है
कई
झूटे
इकट्ठे
हों
तो
सच्चा
टूट
जाता
है
Haseeb Soz
Send
Download Image
45 Likes
मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
Send
Download Image
43 Likes
मिले
थे
फरवरी
में
आपसे
पहली
दफ़ा
हम
तभी
से
दोस्ती
सी
हो
गई
है
फरवरी
से
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
23 Likes
अपने
होंटों
पर
सजाना
चाहता
हूँ
आ
तुझे
मैं
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
Qateel Shifai
Send
Download Image
24 Likes
प्यार
दो
बार
थोड़ी
होता
है
हो
तो
फिर
प्यार
थोड़ी
होता
है
यही
बेहतर
है
तुम
उसे
रोको
मुझ
सेे
इनकार
थोड़ी
होता
है
Read Full
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
136 Likes
इश्क़
का
एजाज़
सज्दों
में
निहाँ
रखता
हूँ
मैं
नक़्श-ए-पा
होती
है
पेशानी
जहाँ
रखता
हूँ
मैं
Behzad Lakhnavi
Send
Download Image
26 Likes
मुझे
शराब
पिलाई
गई
है
आँखों
से
मेरा
नशा
तो
हज़ारों
बरस
में
उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
Send
Download Image
48 Likes
मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
Send
Download Image
2 Likes
ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
Read Full
Farhat Ehsaas
Send
Download Image
57 Likes
Read More
मोहब्बत
से
मोहब्बत
मिल
गई
जैसे
कि
सहरा
में
कली
इक
खिल
गई
जैसे
न
जाने
कैसे
तुम
बिन
जी
रहा
था
मैं
समझ
लो
हर
घड़ी
मुश्किल
गई
जैसे
चली
थी
रेल
इक
सीटी
बजाए
बिन
जो
मेरे
दिल
से
तेरे
दिल
गई
जैसे
न
निकला
लफ़्ज़
उसके
रू-ब-रू
मेरा
मेरे
वो
होंठ
दोनों
सिल
गई
जैसे
ग़ज़ल
को
मेरी
तूने
गुनगुनाया
जब
लगा
मेरी
हाँ
में
हाँ
मिल
गई
जैसे
उसे
इतना
क़रीबी
क्यो
बनाया
'कब्क'
गया
इक
शख़्स
तो
महफ़िल
गई
जैसे
Read Full
Krishnakant Kabk
Download Image
18 Likes
रोज़
ख़्वाबों
में
मुझे
दिखता
तेरा
घर
काश
नींदों
में
कभी
मैं
चल
भी
पाता
Krishnakant Kabk
Send
Download Image
32 Likes
कुछ
नहीं
हो
सका
पैसे
से
दाना
बन
रोज़
कीमत
बढ़ा
ख़ुद
की
ख़ुद
पैसा
बन
दाम
कम
ही
मिलेगा
रहा
गर
उदास
थोड़ा
और
मुस्कुरा
थोड़ा
और
महंगा
बन
बादलों
ने
खुला
छोड़
कर
बूंद
को
कह
दिया
झील
बन
दरिया
बन
सहरा
बन
पूरा
पागल
हो
जाएगा
तू
ख़ुद-ब-ख़ुद
तुझको
पागल
ही
बनना
है
तो
आधा
बन
मतलबी
दुनिया
में
इश्क़
करना
है
तो
दिल
की
हर
बात
सुन
और
फिर
बहरा
बन
Read Full
Krishnakant Kabk
Download Image
7 Likes
मोहब्बत
से
मोहब्बत
मिल
गई
जैसे
कि
सहरा
में
कली
इक
खिल
गई
जैसे
न
जाने
कैसे
तुम
बिन
जी
रहा
था
मैं
समझ
लो
हर
घड़ी
मुश्किल
गई
जैसे
Read Full
Krishnakant Kabk
Send
Download Image
58 Likes
ज़रा
सा
हाथ
लगने
से
हो
जाते
ज़ख़्म
सारे
ठीक
तेरे
हाथों
में
जादू
है
तू
चारासाज़
थोड़ी
है
Krishnakant Kabk
Send
Download Image
24 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Aawargi Shayari
Raushni Shayari
Udasi Shayari
Nazar Shayari
Political Shayari