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Muneer Niyazi
main us ko dekh ke chup tha usii ki shaa
main us ko dekh ke chup tha usii ki shaa | मैं उस को देख के चुप था उसी की शादी में
- Muneer Niyazi
मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
- Muneer Niyazi
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जो
मैं
उसके
हिस्से
में
सारा
हुआ
तो
फिर
इक
बार
वो
सब
दुबारा
हुआ
तो
तिरे
ख़्वाब
तो
ऐश
ओ
आराम
के
हैं
मिरे
साथ
जो
बस
गुज़ारा
हुआ
तो
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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ख़ुदा
की
क़सम
उस
ने
खाई
जो
आज
क़सम
है
ख़ुदा
की
मज़ा
आ
गया
Dagh Dehlvi
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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शिकायतें
भी
बहुत
हैं
हिकायतें
भी
बहुत
मज़ा
तो
जब
है
कि
यारों
के
रू-ब-रू
कहिए
Ali Sardar Jafri
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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इश्क़
करना
इक
सज़ा
है
क्या
करें
इश्क़
का
अपना
मज़ा
है
क्या
करें
Syed Naved Imam
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मिरी
वफ़ा
का
तिरा
लुत्फ़
भी
जवाब
नहीं
मिरे
शबाब
की
क़ीमत
तिरा
शबाब
नहीं
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
मज़ा
था
दिल-लगी
का
कि
बराबर
आग
लगती
न
तुझे
क़रार
होता
न
मुझे
क़रार
होता
Dagh Dehlvi
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ज़रा
नज़रों
से
कह
दो
जी
निशाना
चूक
न
जाए
मज़ा
जब
है
तुम्हारी
हर
अदा
क़ातिल
ही
कहलाए
Shakeel Badayuni
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सदा
ऐश
दौराँ
दिखाता
नहीं
गया
वक़्त
फिर
हाथ
आता
नहीं
Meer Hasan
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मकाँ
है
क़ब्र
जिसे
लोग
ख़ुद
बनाते
हैं
मैं
अपने
घर
में
हूँ
या
मैं
किसी
मज़ार
में
हूँ
Muneer Niyazi
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आवाज़
दे
के
देख
लो
शायद
वो
मिल
ही
जाए
वर्ना
ये
उम्र
भर
का
सफ़र
राएगाँ
तो
है
Muneer Niyazi
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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ख़याल
जिस
का
था
मुझे
ख़याल
में
मिला
मुझे
सवाल
का
जवाब
भी
सवाल
में
मिला
मुझे
Muneer Niyazi
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हवा
जब
चली
फड़फड़ा
कर
उड़े
परिंदे
पुराने
महल्लात
के
Muneer Niyazi
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