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Shakeel Badayuni
zaraa nazaron se kah do jee nishaana chook na jaa.e
zaraa nazaron se kah do jee nishaana chook na jaa.e | ज़रा नज़रों से कह दो जी निशाना चूक न जाए
- Shakeel Badayuni
ज़रा
नज़रों
से
कह
दो
जी
निशाना
चूक
न
जाए
मज़ा
जब
है
तुम्हारी
हर
अदा
क़ातिल
ही
कहलाए
- Shakeel Badayuni
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कुछ
इस
अदास
मोहब्बत-शनास
होना
है
ख़ुशी
के
बाब
में
मुझ
को
उदास
होना
है
Rahul Jha
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आज
भी
वो
वो
ही
है
और
अदा
भी
वो
ही
है
बे-वफ़ा
भी
वो
ही
है
और
ख़फ़ा
भी
वो
ही
है
Aatish Indori
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ठीक
है
मालूम
है
जैसे
हैं
हम
पूछना
तो
चाहिए
कैसे
हैं
हम
आवरन
है
सख़्त
भीतर
नर्म
फल
देखिए
अख़रोट
को
ऐसे
हैं
हम
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Atul K Rai
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इस
ज़माने
को
ज़माने
की
अदा
आती
है
और
इक
हम
है
हमें
सिर्फ़
वफ़ा
आती
है
Zubair Ali Tabish
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जिस
की
जानिब
'अदा'
नज़र
न
उठी
हाल
उस
का
भी
मेरे
हाल
सा
था
Ada Jafarey
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तुम्हारी
इक
झलक
से
रंग
उल्फत
के
उड़ाए
हैं
नज़ारों
की
नज़ाकत
को
ज़रा
देखो
मेरी
जानाँ
Aniket sagar
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हम
तो
तमाम
उम्र
तिरी
ही
अदा
रहे
ये
क्या
हुआ
कि
फिर
भी
हमीं
बे-वफ़ा
रहे
Jameel Malik
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जो
खानदानी
रईस
हैं
वो
मिज़ाज
रखते
हैं
नर्म
अपना
तुम्हारा
लहजा
बता
रहा
है,
तुम्हारी
दौलत
नई
नई
है
Shabeena Adeeb
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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हया
से
सर
झुका
लेना
अदास
मुस्कुरा
देना
हसीनों
को
भी
कितना
सहल
है
बिजली
गिरा
देना
Akbar Allahabadi
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कभी
यक-ब-यक
तवज्जोह
कभी
दफ़अतन
तग़ाफ़ुल
मुझे
आज़मा
रहा
है
कोई
रुख़
बदल
बदल
कर
Shakeel Badayuni
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दिल
के
बहलाने
की
तदबीर
तो
है
तू
नहीं
है
तिरी
तस्वीर
तो
है
हम-सफ़र
छोड़
गए
मुझको
तो
क्या
साथ
मेरे
मिरी
तक़दीर
तो
है
क़ैद
से
छूट
के
भी
क्या
पाया
आज
भी
पाँव
में
ज़ंजीर
तो
है
क्या
मजाल
उनकी
न
दें
ख़त
का
जवाब
बात
कुछ
बाइस-ए-ताख़ीर
तो
है
पुर्सिश-ए-हाल
को
वो
आ
ही
गए
कुछ
भी
हो
इश्क़
में
तासीर
तो
है
ग़म
की
दुनिया
रहे
आबाद
'शकील'
मुफ़्लिसी
में
कोई
जागीर
तो
है
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Shakeel Badayuni
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दिल
चीज़
क्या
है
दिल
से
मोहब्बत
जताए
कौन
अपना
जो
ख़ुद
न
हो
उसे
अपना
बनाए
कौन
Shakeel Badayuni
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तिरे
बग़ैर
अजब
बज़्म-ए-दिल
का
आलम
है
चराग़
सैंकड़ों
जलते
हैं
रौशनी
कम
है
Shakeel Badayuni
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बे-झिझक
आ
गए
बेख़बर
आ
गए
आज
रिन्दों
में
वाइज़
किधर
आ
गए
गुफ़्तगू
उन
सेे
होती
ये
किस्मत
कहाँ
ये
भी
उनका
करम
है
नज़र
आ
गए
आना
जाना
भी
ये
ख़ूब
है
आप
का
बे-कहे
चल
दिए
बेख़बर
आ
गए
हम
तो
रोते
ही
थे
इश्क़
में
रात
दिन
तुम
भी
आख़िर
इसी
राह
पर
आ
गए
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Shakeel Badayuni
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