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Atul K Rai
theek hai maaloom hai jaise hain ham
theek hai maaloom hai jaise hain ham | ठीक है मालूम है जैसे हैं हम
- Atul K Rai
ठीक
है
मालूम
है
जैसे
हैं
हम
पूछना
तो
चाहिए
कैसे
हैं
हम
आवरन
है
सख़्त
भीतर
नर्म
फल
देखिए
अख़रोट
को
ऐसे
हैं
हम
- Atul K Rai
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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मेरे
सीने
में
नहीं
तो
तेरे
सीने
में
सही
हो
कहीं
भी
आग
लेकिन
आग
जलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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इतना
ऊँचा
उड़ना
भी
कुछ
ठीक
नहीं
पाबंदी
लग
जाती
है
परवाज़ों
पर
तुझको
छू
कर
और
किसी
की
चाह
रखे
हैरत
है
और
लानत
है
ऐसे
हाथों
पर
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Varun Anand
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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क़त्अ
कीजे
न
त'अल्लुक़
हम
से
कुछ
नहीं
है
तो
अदावत
ही
सही
Mirza Ghalib
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सदाक़त
हो
तो
दिल
सीनों
से
खिंचने
लगते
हैं
वाइज़
हक़ीक़त
ख़ुद
को
मनवा
लेती
है
मानी
नहीं
जाती
Jigar Moradabadi
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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बरखा
किए
बग़ैर
ही
बादल
चले
गए
गर्मी
से
फिर
ज़मीन
की
चमड़ी
उधड़
गई
Atul K Rai
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झूठा
है
सच्चा
भी
तो
हो
सकता
है
चश्मा
है
गन्दा
भी
तो
हो
सकता
है
बारिश
केवल
बादल
की
मजबूरी
है
बादल
का
ग़ुस्सा
भी
तो
हो
सकता
है
हो
सकता
है
दीवालों
में
सीड़न
हो
आँगन
पर
अच्छा
भी
तो
हो
सकता
है
आँसू
पोंछ
रही
मुफ़लिस
की
उम्मीदें
महँगा
कल
सस्ता
भी
तो
हो
सकता
है
हो
सकता
है
ऊब
गई
हो
मंज़िल
भी
झगड़ा
इक
रस्ता
भी
तो
हो
सकता
है
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Atul K Rai
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मरा
है
एक
लड़का
हिचकियों
से
रगड़
कर
नाक
मर
जाओ
रक़ीबों
Atul K Rai
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उस
सेे
पहले
उसकी
ख़ुश्बू
आती
है
दरवाज़े
से
पहले
मैं
खुल
जाता
हूँ
Atul K Rai
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तिरंगे
को
हवा
से
बात
करते
देखते
हैं
जब
बदन
में
झुरझुरी
होती
है
रोंये
फूट
जाते
हैं
Atul K Rai
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