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Nirvesh Navodayan
mutassir hain yahaañ sab log jaane kya samjhte hain
mutassir hain yahaañ sab log jaane kya samjhte hain | मुतअस्सिर हैं यहाँ सब लोग जाने क्या समझते हैं
- Nirvesh Navodayan
मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
- Nirvesh Navodayan
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मैं
इस
ख़याल
से
शर्मिंदगी
में
डूब
गया
कि
मेरे
होते
हुए
वो
नदी
में
डूब
गया
Siraj Faisal Khan
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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अगर
फ़ुर्सत
मिले
पानी
की
तहरीरों
को
पढ़
लेना
हर
इक
दरिया
हज़ारों
साल
का
अफ़्साना
लिखता
है
Bashir Badr
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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क्या
ही
होगा
रहने
से
मेरे
बन
के
काम
सभी
करने
हैं
जब
उसके
मन
के
मैंने
सारे
के
सारे
गिन
रक्खे
हैं
तिल
चेहरे
के
हों
या
उसकी
गर्दन
के
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Nirvesh Navodayan
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नींद
हमें
कब
तक
आयेगी
कब
तक
करवट
बदलेंगे
हम?
Nirvesh Navodayan
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हिज्र
सभी
गर
एक
कहानी
में
मिलते
हम
भी
किसी
तस्वीर
पुरानी
में
मिलते
कोई
रंग
अगर
होता
इनका
तो
फिर
सोचो
कितने
आँसू
पानी
में
मिलते
ढल
जाएगा
इक
दिन
हुस्न
तुम्हारा
जब
सोचोगे
फिर
काश
जवानी
में
मिलते
सच
में
हिज्र
बुरा
होता
तो
हम
जैसे
आज
यहाँ
पे
नहीं
वीरानी
में
मिलते
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Nirvesh Navodayan
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सोचो
कुछ
तो
बात
रही
होगी
वरना
तोहफ़े
में
अँगूठी
कोई
नहीं
देता
Nirvesh Navodayan
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जितनी
ही
ज़्यादा
ऊँचाई
होती
है
बाज़ू
उतनी
गहरी
खाई
होती
है
कुछ
जोड़े
ऊपर
से
बन
के
आते
हैं
साथ
मिरे
हर
पल
तन्हाई
होती
है
वो
मुझ
में
बिल्कुल
ऐसे
ही
है
जैसे
इक
रामायण
में
चौपाई
होती
है
एक
दफ़ा
लड़की
दिल
तोड़े
फिर
देखो
उसके
बाद
शदीद
पढ़ाई
होती
है
बाद
बिछड़
के
उस
सेे
ये
जाना
हमने
अच्छा
होना
एक
बुराई
होती
है
ग़म
पी
कर
आँसू
रोके
जा
सकते
हैं
चीख़
छुपाने
को
शहनाई
होती
है
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Nirvesh Navodayan
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