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Nirvesh Navodayan
hijr sabhi gar ek kahaanii men milte
hijr sabhi gar ek kahaanii men milte | हिज्र सभी गर एक कहानी में मिलते
- Nirvesh Navodayan
हिज्र
सभी
गर
एक
कहानी
में
मिलते
हम
भी
किसी
तस्वीर
पुरानी
में
मिलते
कोई
रंग
अगर
होता
इनका
तो
फिर
सोचो
कितने
आँसू
पानी
में
मिलते
ढल
जाएगा
इक
दिन
हुस्न
तुम्हारा
जब
सोचोगे
फिर
काश
जवानी
में
मिलते
सच
में
हिज्र
बुरा
होता
तो
हम
जैसे
आज
यहाँ
पे
नहीं
वीरानी
में
मिलते
- Nirvesh Navodayan
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मैं
इस
लिए
भी
तेरे
फ़न
की
क़द्र
करता
हूँ
तू
झूठ
बोल
के
आँसू
निकाल
लेता
है
Ahmad Kamal Parvazi
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मैं
किसी
आँख
से
छलका
हुआ
आँसू
हूँ
'नबील'
मेरी
ताईद
ही
क्या
मेरी
बग़ावत
कैसी
Aziz Nabeel
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अपनी
नज़रों
में
गिर
चुका
हूँ
मैं
ये
तरीक़ा
भी
ख़ुद-कुशी
का
था
Bhavesh Pathak
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तेरी
यादों
में
निकले
अश्क़
भी
ज़ाया'
नहीं
जाते
मैं
आँसू
पोछ
करके
आस्तीं
को
चूम
लेता
हूँ
Shabab Shahzad Khan
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
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Bhaskar Shukla
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ख़ुद-कुशी
करने
से
बेहतर
ज़िंदगी
के
खेल
में
फीस
पूरी
दीजिए
पूरा
तमाशा
देखिए
Vijay Anand Mahir
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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मेरे
आँसू
मिरे
अंदर
ही
गिरे
रोने
से
जी
और
बोझल
हो
गया
Abbas Tabish
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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प्यार
किया
फिर
अभिमान
किया
फिर
अपना
ही
नुकसान
किया
सब
यादें
अंदर
दफना
लीं
ख़ुद
को
ही
कब्रिस्तान
किया
ग़लती
ये
के
उस
लड़की
को
ना
जाना
हमने,
जान
किया
उसने
छोड़ा
गाली
दे
कर
हमने
आख़िर
तक
सम्मान
किया
यार
जुदा
हो
कर
ख़ुश
हो
गर
जाओ
इक
और
एहसान
किया
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Nirvesh Navodayan
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वो
इक
तुम्हारा
कमरा
गर
ख़ाली
है
फिर
मेरे
ख़ातिर
सारा
घर
ख़ाली
है
लानत
है
और
हैरत
ऐसे
दिल
पर
के
भारी
भारी
रहता
है
पर
ख़ाली
है
मैं
कैसे
बैठूँ
उसके
बाजू
,
कि
जगह
न
इधर
ख़ाली
है
ना
ही
उधर
ख़ाली
है
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Nirvesh Navodayan
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पछताओगे
इक
दिन
जब
तुम
देखोगे
दोस्त,
हमारी
तस्वीर
बड़े
पर्दे
पर
Nirvesh Navodayan
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जो
भी
खोने
के
डर
से
डर
जाते
हैं
सब
के
सब
मेरे
यार
बिखर
जाते
हैं
एक
सवाल
सभी
का
है
मेरा
भी,
के
उसके
ठुकराए
लोग
किधर
जाते
हैं
कि
अकेला
हूँ
मैं
और
सुना
है
मैंने
लोग
अकेले
में
अक्सर
मर
जाते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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ऐसा
नईं,
उन
सेे
प्यार
नहीं
होता
है
मुश्किल
ये
कि
लगातार
नहीं
होता
है
इन
बालों
की
तरतीबी
तक
नई
जाती
इतना
भी
इश्क़
समझदार
नहीं
होता
है
तुम
सेे
मिलने
का
मन,
कैसे
समझाएँ
कि
नहीं
होता
है
यार
नहीं
होता
है
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Nirvesh Navodayan
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