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Siraj Faisal Khan
main is khayal se sharmindagi men doob gaya
main is khayal se sharmindagi men doob gaya | मैं इस ख़याल से शर्मिंदगी में डूब गया
- Siraj Faisal Khan
मैं
इस
ख़याल
से
शर्मिंदगी
में
डूब
गया
कि
मेरे
होते
हुए
वो
नदी
में
डूब
गया
- Siraj Faisal Khan
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
Vashu Pandey
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
Tehzeeb Hafi
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दूर
से
ही
बस
दरिया
दरिया
लगता
है
डूब
के
देखो
कितना
प्यासा
लगता
है
Waseem Barelvi
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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कोई
समुन्दर,
कोई
नदी
होती,
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता?
Tehzeeb Hafi
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जब
से
हासिल
हुआ
है
वो
मुझ
को
ख़्वाब
आने
लगे
बिछड़ने
के
Siraj Faisal Khan
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चाँद
बैठा
हुआ
है
पहलू
में
क़तरा
क़तरा
पिघल
रहा
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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त'अल्लुक़
तोड़
कर
उस
की
गली
से
कभी
मैं
जुड़
न
पाया
ज़िंदगी
से
ख़ुदा
का
आदमी
को
डर
कहाँ
अब
वो
घबराता
है
केवल
आदमी
से
मिरी
ये
तिश्नगी
शायद
बुझेगी
किसी
मेरी
ही
जैसी
तिश्नगी
से
बहुत
चुभता
है
ये
मेरी
अना
को
तुम्हारा
बात
करना
हर
किसी
से
ख़सारे
को
ख़सारे
से
भरूँगा
निकालूँगा
उजाला
तीरगी
से
तुम्हें
ऐ
दोस्तो
मैं
जानता
हूँ
सुकूँ
मिलता
है
मेरी
बेकली
से
हवाओं
में
कहाँ
ये
दम
था
'फ़ैसल'
दिया
मेरा
बुझा
है
बुज़दिली
से
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Siraj Faisal Khan
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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कई
दिन
बाद
उस
ने
गुफ़्तुगू
की
कई
दिन
बाद
फिर
अच्छा
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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