hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Tehzeeb Hafi
aapne mujhko daboya hai kisi aur jagah
aapne mujhko daboya hai kisi aur jagah | आपने मुझको डुबोया है किसी और जगह
- Tehzeeb Hafi
आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
- Tehzeeb Hafi
Download Sher Image
मैं
सालों
बाद
जब
भी
गाँव
जाता
हूँ
लिए
पीपल
की
ठंडी
छाँव
जाता
हूँ
कहीं
मैली
न
हो
जाए
ये
जन्नत
मैं
माँ
के
पास
नंगे
पाँव
जाता
हूँ
Read Full
Ashok Sagar
Send
Download Image
3 Likes
हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
Send
Download Image
21 Likes
तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
330 Likes
धूप
के
एक
ही
मौसम
ने
जिन्हें
तोड़
दिया
इतने
नाज़ुक
भी
ये
रिश्ते
न
बनाये
होते
Waseem Barelvi
Send
Download Image
32 Likes
उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
Send
Download Image
32 Likes
मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
Read Full
Nirvesh Navodayan
Send
Download Image
7 Likes
अगर
जन्नत
मिला
करती
फ़क़त
सज्दों
के
बदले
में
तो
फिर
इबलीस
मुर्शिद
सब
सेे
पहले
जन्नती
होता
Shajar Abbas
Send
Download Image
3 Likes
नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
Read Full
Asrar Ul Haq Majaz
Send
Download Image
19 Likes
हम
को
मालूम
है
जन्नत
की
हक़ीक़त
लेकिन
दिल
के
ख़ुश
रखने
को
'ग़ालिब'
ये
ख़याल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
Send
Download Image
484 Likes
मैं
कुछ
दिन
से
अचानक
फिर
अकेला
पड़
गया
हूँ
नए
मौसम
में
इक
वहशत
पुरानी
काटती
है
Liaqat Jafri
Send
Download Image
37 Likes
Read More
मुझे
आज़ाद
कर
दो
एक
दिन
सब
सच
बता
कर
तुम्हारे
और
उसके
दरमियाँ
क्या
चल
रहा
है
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
218 Likes
इक
हवेली
हूँ
उस
का
दर
भी
हूँ
ख़ुद
ही
आँगन
ख़ुद
ही
शजर
भी
हूँ
अपनी
मस्ती
में
बहता
दरिया
हूँ
मैं
किनारा
भी
हूँ
भँवर
भी
हूँ
आसमाँ
और
ज़मीं
की
वुसअत
देख
मैं
इधर
भी
हूँ
और
उधर
भी
हूँ
ख़ुद
ही
मैं
ख़ुद
को
लिख
रहा
हूँ
ख़त
और
मैं
अपना
नामा-बर
भी
हूँ
दास्ताँ
हूँ
मैं
इक
तवील
मगर
तू
जो
सुन
ले
तो
मुख़्तसर
भी
हूँ
एक
फलदार
पेड़
हूँ
लेकिन
वक़्त
आने
पे
बे-समर
भी
हूँ
Read Full
Tehzeeb Hafi
Download Image
19 Likes
कोई
तुम्हारा
सफ़र
पर
गया
तो
पूछेंगे
रेल
देख
के
हम
हाथ
क्यूँ
हिलाते
हैं
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
112 Likes
तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
330 Likes
जब
उस
की
तस्वीर
बनाया
करता
था
कमरा
रंगों
से
भर
जाया
करता
था
पेड़
मुझे
हसरत
से
देखा
करते
थे
मैं
जंगल
में
पानी
लाया
करता
था
थक
जाता
था
बादल
साया
करते
करते
और
फिर
मैं
बादल
पे
साया
करता
था
बैठा
रहता
था
साहिल
पे
सारा
दिन
दरिया
मुझ
से
जान
छुड़ाया
करता
था
बिंत-ए-सहरा
रूठा
करती
थी
मुझ
से
मैं
सहरा
से
रेत
चुराया
करता
था
Read Full
Tehzeeb Hafi
Download Image
24 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Bewafai Shayari
Birthday Shayari
Fasad Shayari
Satire Shayari
Saadgi Shayari