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Ashok Sagar
main saalon baad jab bhi gaav jaata hooñ
main saalon baad jab bhi gaav jaata hooñ | मैं सालों बाद जब भी गाँव जाता हूँ
- Ashok Sagar
मैं
सालों
बाद
जब
भी
गाँव
जाता
हूँ
लिए
पीपल
की
ठंडी
छाँव
जाता
हूँ
कहीं
मैली
न
हो
जाए
ये
जन्नत
मैं
माँ
के
पास
नंगे
पाँव
जाता
हूँ
- Ashok Sagar
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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बातें
बनाने
में
माहिर
नहीं
हम
बातें
बनाना
है
पेशा
हमारा
Ashok Sagar
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मुझे
जिस
सेे
मुहब्बत
है
बहुत
ही
ख़ूब-सूरत
है
अँगूठी
उसने
ले
ली
है
पहन
ले
तो
ग़नीमत
है
मुझे
वो
मिल
नहीं
सकती
मगर
पाने
की
हसरत
है
लिखा
है
ये
सभी
ख़त
में
मेरा
ये
आख़िरी
ख़त
है
मुहब्बत
नाम
की
है
अब
जिधर
देखो
तिजारत
है
नज़र
जो
फेर
ली
उसने
क़यामत
ही
क़यामत
है
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Ashok Sagar
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मैंने
अपना
लिया
ग़ज़ल
को
जब
शा'इरी
ने
मुझे
ही
छोड़
दिया
Ashok Sagar
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आप
वो
और
हम
सब
यहाँ
मिलते
हैं
है
मगर
जिनसे
चाहत
कहाँ
मिलते
हैं
Ashok Sagar
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कोई
मेरा
साथी
बन
जाए
अंधे
की
लाठी
बन
जाए
मात
पिता
को
ऐसे
पूजो
सारा
घर
काशी
बन
जाए
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Ashok Sagar
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