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Asrar Ul Haq Majaz
nahin har chand kisi gum-shuda jannat ki talash
nahin har chand kisi gum-shuda jannat ki talash | नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
- Asrar Ul Haq Majaz
नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
- Asrar Ul Haq Majaz
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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हम
को
मालूम
है
जन्नत
की
हक़ीक़त
लेकिन
दिल
के
ख़ुश
रखने
को
'ग़ालिब'
ये
ख़याल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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इसी
दुनिया
में
दिखा
दें
तुम्हें
जन्नत
की
बहार
शैख़
जी
तुम
भी
ज़रा
कू-ए-बुताँ
तक
आओ
Ali Sardar Jafri
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चलती
फिरती
हुई
आँखों
से
अज़ाँ
देखी
है
मैं
ने
जन्नत
तो
नहीं
देखी
है
माँ
देखी
है
Munawwar Rana
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फ़र्त-ए-ख़ुशी
से
अपनी
जो
भी
रश्क
करते
हैं
उनको
तिरी
बनाई
वो
जन्नत
तलब
नहीं
Sabir Hussain
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हम
क्या
जानें
जन्नत
कैसी
होती
है
उस
सेे
पूछो
जिसने
तुमको
पाया
है
Harsh saxena
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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दानिशमंदों
रस्ता
बतला
सकते
हो
दीवाना
हूँ
वीराने
तक
जाना
है
जन्नत
वाले
थोड़ा
पहले
उतरेंगे
रिन्दों
को
तो
मयख़ाने
तक
जाना
है
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Vishal Bagh
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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हम
आसमाँ
के
लोग
थे
जन्नत
से
आए
थे
ख़ुद
को
मगर
ज़मीं
में
बोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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ख़िरद
की
इताअत
ज़रूरी
सही
यही
तो
जुनूँ
का
ज़माना
भी
है
न
दुनिया
न
उक़्बा
कहाँ
जाइए
कहीं
अहल-ए-दिल
का
ठिकाना
भी
है
ज़माने
से
आगे
तो
बढ़िए
'मजाज़'
ज़माने
को
आगे
बढ़ाना
भी
है
मुझे
आज
साहिल
पे
रोने
भी
दो
कि
तूफ़ान
में
मुस्कुराना
भी
है
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Asrar Ul Haq Majaz
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छुप
गए
वो
साज़-ए-हस्ती
छेड़
कर
अब
तो
बस
आवाज़
ही
आवाज़
है
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
आना
कोई
आना
है
कि
बस
रस्मन
चले
आए
ये
मिलना
ख़ाक
मिलना
है
कि
दिल
से
दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
डाइन
है
भरी
गोदों
से
बच्चे
छीन
लेती
है
ये
ग़ैरत
छीन
लेती
है
हमिय्यत
छीन
लेती
है
ये
इंसानों
से
इंसानों
की
फ़ितरत
छीन
लेती
है
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Asrar Ul Haq Majaz
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बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
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