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Asrar Ul Haq Majaz
khird ki itaaat zaroori sahi
khird ki itaaat zaroori sahi | ख़िरद की इताअत ज़रूरी सही
- Asrar Ul Haq Majaz
ख़िरद
की
इताअत
ज़रूरी
सही
यही
तो
जुनूँ
का
ज़माना
भी
है
न
दुनिया
न
उक़्बा
कहाँ
जाइए
कहीं
अहल-ए-दिल
का
ठिकाना
भी
है
ज़माने
से
आगे
तो
बढ़िए
'मजाज़'
ज़माने
को
आगे
बढ़ाना
भी
है
मुझे
आज
साहिल
पे
रोने
भी
दो
कि
तूफ़ान
में
मुस्कुराना
भी
है
- Asrar Ul Haq Majaz
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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दुनिया
के
ताने
सह
लेता
हूँ
इक
अच्छा
बेटा
कहलाना
है
Neeraj Neer
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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ये
जितने
मसाइल
हैं
दुनिया
में,
सब
तुझे
देखने
से
सुलझ
जाएँगे
Siddharth Saaz
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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तुमने
तो
हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना
सुना
दिया
किस
दिल
से
आह
तर्क-ए-तमन्ना
करे
कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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सदा
दी
तू
ने
क्या
जाने
कहाँ
से
मगर
मैं
जानिब-ए-दिल
देखता
हूँ
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
डाइन
है
भरी
गोदों
से
बच्चे
छीन
लेती
है
ये
ग़ैरत
छीन
लेती
है
हमिय्यत
छीन
लेती
है
ये
इंसानों
से
इंसानों
की
फ़ितरत
छीन
लेती
है
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Asrar Ul Haq Majaz
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शौक़
के
हाथों
ऐ
दिल-ए-मुज़्तर
क्या
होना
है
क्या
होगा
इश्क़
तो
रुस्वा
हो
ही
चुका
है
हुस्न
भी
क्या
रुस्वा
होगा
Asrar Ul Haq Majaz
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