tapish se bhag kar pyaasa gaya hai | तपिश से भाग कर प्यासा गया है

  - Jagdeesh Raj Figar
तपिशसेभागकरप्यासागयाहै
समुंदरकीतरफ़सहरागयाहै
कुआँमौजूदहैजलभीमुयस्सर
वोमेरेघरसेक्यूँँतिश्नागयाहै
दोबारारूहउसमेंफूँकदोतुम
बदनजोफिरअकेलागयाहै
ज़माँअपनीरविशपरतोहैक़ाएम
मगरलम्हातमेंफ़र्क़गयाहै
सफ़रमेंताज़ा-दमहोगावोकैसे
जोघरहीसेथका-माँदागयाहै
बनाहोगाख़स-ओ-ख़ाशाकसेवो
जोनभजलताहुआदेखागयाहै
मुझेलहरोंकीकश्तीपरबिठाकर
भँवरकीखोजमेंदरियागयाहै
ज़मींसेभीतवक़्क़ोकुछहैऐसी
दिमाग़-ए-चर्ख़जबचकरागयाहै
जोउतराअर्शकाइकएकतबक़ा
ज़मींपरदायराबनतागयाहै
फ़िक्र-ए-वर्ताथीउसकोज़राभी
वोकश्तीज़ीस्तकीखेतागयाहै
'फ़िगार'उसमेंवजूदउसकामिलेगा
जोजूयाँबहरकाक़तरागयाहै
  - Jagdeesh Raj Figar
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