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Subhan Asad
main ek thehra hua pul tu bahta dariyaa hai
main ek thehra hua pul tu bahta dariyaa hai | मैं एक ठहरा हुआ पुल, तू बहता दरिया है
- Subhan Asad
मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
- Subhan Asad
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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तुम
मुझे
उतनी
ही
प्यारी
हो
मेरी
जाँ
जितना
प्यारा
है
कश्मीर
इस
देश
को
Alankrat Srivastava
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शब
बसर
करनी
है,
महफ़ूज़
ठिकाना
है
कोई
कोई
जंगल
है
यहाँ
पास
में
?
सहरा
है
कोई
?
Umair Najmi
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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मैं
जानता
हूँ
तेरी
रूह
की
तलब
जानाँ
तुझे
बदन
की
तरफ़
से
नहीं
छूउँगा
मैं
Subhan Asad
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रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
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Subhan Asad
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ग़म
से
फ़ुर्सत
नहीं
कि
तुझ
से
कहें
तुझ
को
रग़बत
नहीं
कि
तुझ
से
कहें
हिज्र-पत्थर
गड़ा
है
सीने
में
पर
वो
शिद्दत
नहीं
कि
तुझ
से
कहें
आरज़ू
कसमसाए
फिरती
है
कोई
सूरत
नहीं
कि
तुझ
से
कहें
ख़ामुशी
की
ज़बाँ
समझ
लेना
अपनी
आदत
नहीं
कि
तुझ
से
कहें
दर्द
हद
से
सिवा
तो
है
लेकिन
ऐसी
हालत
नहीं
कि
तुझ
से
कहें
दिल
को
अब
भी
तिरा
जुनूँ
है
'असद'
ऐसी
वहशत
नहीं
कि
तुझ
से
कहें
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Subhan Asad
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कभी
न
लौट
के
आया
वो
शख़्स,
कहता
था
ज़रा
सा
हिज्र
है
बस
सरसरी
बिछड़ना
है
Subhan Asad
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जब
बुलंदी
का
गुमाँ
था
तो
नहीं
याद
आई
अपनी
परवाज़
से
टूटे
तो
ज़मीं
याद
आई
वही
आँखें
कि
जो
ईमान-शिकन
आँखें
हैं
उन्हीं
आँखों
की
हमें
दावत-ए-दीं
याद
आई
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Subhan Asad
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