zarf-e-koh-na gala diya jaa.e | ज़र्फ़-ए-कोहना गला दिया जाए

  - Jagdeesh Raj Figar
ज़र्फ़-ए-कोहनागलादियाजाए
रूपउसकोनयादियाजाए
अपनीअग्नीमेंवोजलेमज़ीद
शम्सकोयेबतादियाजाए
पूछनाक्याहैबूढेअंबरसे
उसकेयदमेंअसादियाजाए
अपनीअपनीहुदूदहीमेंरहें
बहर-ओ-बरकोबतादियाजाए
इनसेफूलोंकोईर्खाहोगी
तितलियोंकोउड़ादियाजाए
सूनासूनाहैजोभीसहनवहाँ
पेड़तनकालगादियाजाए
महवशोंकीजोफ़स्ललेनीहै
अर्ज़परमहउगादियाजाए
अर्ज़केवास्तेयेअच्छाहै
बीचमेंनभहटादियाजाए
सुब्हहोजबतोमाहताबकोक्या
लोरीदेकरसुलादियाजाए
इनकोलम्होंमेंबाँटनाहैअभी
साअ'तोंकोबढ़ादियाजाए
ज़िंदगीहैअगरसराब'फ़िगार'
जगकोसहराबनादियाजाए
  - Jagdeesh Raj Figar
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