ye naadaan zehan hai jo sochta hai | ये नादाँ ज़ेहन है जो सोचता है

  - Jagdeesh Raj Figar
येनादाँज़ेहनहैजोसोचताहै
ख़लामेंक्याकहेंसौत-ओ-सदाहै
क़लमनेजोभीकाग़ज़परलिखाहै
मिरेअफ़्कारकावोआइनाहै
इकऐसाभीहैपानीकापरिंदा
तह-ए-क़ुल्ज़ुमपेजिसकाघोंसलाहै
फ़रिश्तोंकीपढ़ोतोहस्तरेखा
दवामउनकेमुक़द्दरमेंलिखाहै
उतारेंगेकभीतौक़-ए-ग़ुलामी
हवाओंकाफ़ज़ाओंनेकहाहै
ज़मींकोअबनहींपहलीसीहरकत
क़मरभीदूरहोताजारहाहै
वहीनाज़िलहुईहैआसमाँसे
किहरबच्चाजहाँकादेवताहै
तमामअसरारखोलेगावोअपने
गगनधरतीकीजानिबचलपड़ाहै
रवाबितइसकेबे-मा'नीहैंसारे
ज़मान-ए-हालसेजोकटगयाहै
मुक़य्यदहीरहाहूँघरमेंअपने
युगोंसेसिलसिलायेचलरहाहै
जहाँकोतंग-बीनीकायेतोहफ़ा
फ़लककीवुसअ'तोंसेक्यामिलाहै
'फ़िगार'इकपैकर-ए-हिल्म-ओ-तहम्मुल
बनाकरसबकेघरमेंरखदियाहै
  - Jagdeesh Raj Figar
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