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Dhiraj Singh 'Tahammul'
KHoon se joda hua har eent dhela ho gaya
KHoon se joda hua har eent dhela ho gaya | ख़ून से जोड़ा हुआ हर ईंट ढेला हो गया
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
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अब
की
होली
में
रहा
बे-कार
रंग
और
ही
लाया
फ़िराक़-ए-यार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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ये
मोहब्बत
की
कहानी
नहीं
मरती
लेकिन
लोग
किरदार
निभाते
हुए
मर
जाते
हैं
Abbas Tabish
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जी
नहीं
भरता
कभी
इक
बार
में
इश्क़
हम
ने
भी
दोबारा
कर
लिया
shaan manral
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रास्ते
में
फिर
वही
पैरों
का
चक्कर
आ
गया
जनवरी
गुज़रा
नहीं
था
और
दिसंबर
आ
गया
Rahat Indori
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बहुत
उदास
था
उस
दिन
मगर
हुआ
क्या
था
हर
एक
बात
भली
थी
तो
फिर
बुरा
क्या
था
Javed Nasir
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ख़ुशी
में
भी
ख़ुशी
होती
नहीं
अब
तेरा
ग़म
ही
सतह
पर
तैरता
है
Umesh Maurya
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मैं
ज़िंदगी
के
सभी
ग़म
भुलाए
बैठा
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
से
कितनी
मुझे
सहूलत
है
Zeeshan Sahil
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तुम्हें
हरगिज़
ग़लत
समझे
न
कोई
रुको
मैं
बे-वफ़ाई
कर
रहा
हूँ
Shadab Javed
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फिर
बालों
में
रात
हुई
फिर
हाथों
में
चाँद
खिला
Adil Mansuri
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तेरा
चेहरा
सुब्ह
का
तारा
लगता
है
सुब्ह
का
तारा
कितना
प्यारा
लगता
है
तुम
से
मिल
कर
इमली
मीठी
लगती
है
तुम
से
बिछड़
कर
शहद
भी
खारा
लगता
है
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Kaif Bhopali
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चराग़ाँ
ढूँढते
हैं
आतिश-ए-दिल
को
बुझाने
को
मुहब्बत
की
समझ
दे
कौन
इस
जाहिल
ज़माने
को
फ़रार-ए-क़ैद
लेकर
उड़
गया
ख़ुशियाँ
घराने
की
किया
था
क़ैद
इक
पंछी
कि
घर
का
दिल
लगाने
को
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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वक़्त
का
था
तक़ाज़ा
बदलता
रहा
कोई
बाहों
में
आ
के
फिसलता
रहा
सोचते
थे
परिंदा
वो
महफ़ूज़
है
क़ैद
खाती
रही
वो
मचलता
रहा
एक
पल
में
छुड़ा
हाथ
रुख़्सत
हुआ
मैं
खड़ा
देर
तक
हाथ
मलता
रहा
यूँँ
नहीं
आ
गया
नूर
ये
शाम
का
डूबता
था
कि
सूरज
वो
जलता
रहा
कौन
थे
लोग
जिनको
मिली
मंज़िलें
उम्र
भर
ही
तहम्मुल
टहलता
रहा
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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मयख़ाना
बनवाया
है
पे
रख
दी
है
तस्वीर
तुम्हारी
मय
की
पूछे
क्या
कोई
मदहोशी
है
तस्वीर
तुम्हारी
दहशत
में
रहता
है
दिल
ये
हर
पल
बस
अंजाम
से
अपने
क्या
होगा
जो
जाने
सब
याँ
रक्खी
है
तस्वीर
तुम्हारी
क्या
सूरत
हम
लिए
मुख़ातिब
होंगे
रोज़–ए–हश्र
ख़ुदास
सज्दे
में
होता
हूँ
जब
भी
दिखती
है
तस्वीर
तुम्हारी
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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फ़क़त
हम
ही
नहीं
रुसवा
हुए
हैं
जान
दिल्ली
में
कई
शाहों
के
टूटे
हैं
यहाँ
अरमान
दिल्ली
में
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शाम
को
दीदार
अपना
आइने
में
हो
गया
फ़ाश
सब
किरदार
अपना
आइने
में
हो
गया
बरगुज़ीदा
एक
सूरत
क़ैद
आँखों
में
हुई
और
बस
घर-बार
अपना
आइने
में
हो
गया
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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